लिपि और बोली में अंतर

Lipi aur boli mai antar in hindi grammar

‘बोली’ मौखिक भाषा का वह स्थानीय रूप है, जो किसी विशेष क्षेत्र या स्थान पर बोली जाती है;
जैसे– हरियाणा में हरियाणवी, कुमाऊं में कुमाऊनी आदि। बोली का प्रयोग केवल बोलचाल में ही किया जाता है। हर जगह की अलग-अलग भाषाएं होती है, जिसकी जो भाषा होती है, वह उसी का इस्तेमाल करते हैं। अगर हम हरियाणवी लोगों को कुमाऊं की भाषा बोलने को कहेंगे तो वे नहीं बोल पाएंगे। किसी विशेष क्षेत्र में बोली को बोलना उचित रहता है।

बोली:– क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली मौखिक भाषा बोली कहलाती है।

भाषा और बोली में अंतर:- भाषा का क्षेत्र व्यापक होता है, जबकि बोली का क्षेत्र सीमित होता है। सभी के अलग-अलग अंतर होते हैं। चाहे वह इंसान हो, जानवर हो, भाषा हो, बोली हो आदि सभी चीजें अलग-अलग प्रकार की होती हैं। भाषा में साहित्य रचना एवं ज्ञान का संग्रह होता है। बोली कथा, किंवदंतियों और लोकोक्तियों तक ही सीमित रहती है। भाषा को हम सुन सकते हैं उसे देख नहीं सकते। बोली को हम देख सकते हैं उसे सुन नहीं सकते।

राष्ट्रभाषा:– जिस भाषा का प्रयोग पूरे राष्ट्र में होता है, उसे राष्ट्रभाषा कहते हैं। भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी है। राष्ट्रभाषा नाम सुनकर ही पता चल रहा है कि पूरे राष्ट्र की भाषा अर्थात इसका अर्थ भी यही है कि जिस भाषा का प्रयोग पूरे राष्ट्र में होता है, उसे ही राष्ट्रभाषा कहते हैं। भारतीय संविधान के अनुसार 14 सितंबर, 1949 को हिंदी भाषा को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया था। इसलिए प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

भारत के संविधान में कई भारतीय भाषाओं को मान्यता प्रदान की गई है। प्रारंभ में 15, फिर 18 और अब 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है,

यह 22 भाषाएं इस प्रकार है:–

१. हिंदी
२. पंजाबी
३. उर्दू
४. डोगरी
५. कोंकणी
६. मराठी
७. गुजराती
८. उड़िया
९. असमिया
१०. बंगाली
११. कश्मीरी
१२. मलयालम
१३. कन्नड़
१४. तेलुगू
१५. तमिल
१६. बोडो
१७. संथाली
१८. नेपाली
१९. मैथिली
२०. सिंधी
२१. संस्कृत
२२. मणिपुरी।

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