लिपि और व्याकरण में अंतर

Leepi aur vyakaran mai antar in hindi grammar

लिपि:– भाषा के लिखने के ढंग को लिपि कहते हैं।
प्रत्येक भाषा के लिखने की व्यवस्था या लिपि अलग-अलग होती है; जैसे–हिंदी जिस रूप में लिखी जाती है, अंग्रेजी वैसी नहीं लिखी जाती। हिंदी की लिपि देवनागरी है, तो अंग्रेजी की लिपि रोमन है। देवनागरी लिपि में भारत की कई भाषाएं; जैसे:– हिंदी, संस्कृत, कोंकणी, नेपाली, मराठी, मैथिली, बोडो आदि लिखी जाती है। कुछ अन्य लीपिया है – उर्दू की फारसी, पंजाबी की गुरुमुखी आदि। इसी प्रकार रोमन लिपि में भी विश्व की कई भाषाएं; जैसे– अंग्रेजी, फारसी, स्पेनिश, जर्मन आदि लिखी जाती है। अलग-अलग भाषाओं की अलग-अलग लिपि होती है। अगर किसी को अंग्रेजी भाषा नहीं आती तो वे उस भाषा को नहीं लिख सकता। जिस व्यक्ति को जो भाषा आती है, वह उसी भाषा को लिख सकते है और पढ़ भी सकते हैं।

व्याकरण:– व्याकरण वह शास्त्र है, जो भाषा के शुद्ध रूप का ज्ञान कराते हुए उसकी एकरूपता बनाए रखता है।
भाषा में ध्वनियों की एक निश्चित व्यवस्था होती है, जो भाषा के बोले जाने का आधार होती है। इसी प्रकार लेखन के लिए भी निश्चित चिन्हों की व्यवस्था होती है जो भाषा को लिखित रूप प्रदान करती है। वह व्यवस्था जो भाषा को निश्चित उच्चारण और निश्चित लेखन में बांधती है, उसे व्याकरण कहते हैं।
व्याकरण नाम सुनकर ही पता चलता है कि व्या+करण करण का अर्थ इसमें समझ आ रहा है कि ‘करना’। इसलिए इसका अर्थ भी यही है कि व्याकरण जो भाषा के शुद्ध रूप का ज्ञान कराते हुए उसको एक सूत्र में बांधे रखता है।


व्याकरण के अंग

व्याकरण के तीन अंग होते हैं–

१. वर्ण– विचार
२. शब्द– विचार
३. वाक्य– विचार

१. वर्ण विचार– इसके अंदर वर्णों के बारे में विचार किया जाता है।

२. शब्द विचार– इस विचार के अंदर शब्दों के विषय में विचार किया जाता है।

३. वाक्य विचार– इस विचार में वाक्यों के विषय में विचार किया जाता है।

व्याकरण के तीन अंगों के नाम को सुनकर ही पता चल रहा है कि जैसे इसमें पहला विचार है वर्ण विचार तो इसमें यह बताया गया है कि इस विचार के अंदर वर्णों के बारे में विचार किया जाता है यानी सोचा जाता है।

दूसरे विचार में बताया गया है कि शब्द विचार। तो इसमें भी है इसके अंदर बताया गया है कि इस विचार के अंदर शब्दों के विषय में विचार किया जाता है।

ऐसे ही तीसरे विचार में बताया गया है कि वाक्य विचार, तो इस विचार के अंतर्गत वाक्यों के विषय में विचार किया जाता है।
तीनों अलग-अलग प्रकार के हैं लेकिन इसके महत्व बहुत महत्वपूर्ण है।

हमने जितना इसमें सीखा आइए कुछ प्रसन्न करके अपने सारे अंदर की इच्छा को समाप्त करें।

१. मन के विचार प्रकट करने का साधन है?

उत्तर– लिपि।

२. भाषा के कितने रूप होते हैं?

उत्तर– भाषा के तीन रूप होते हैं।

३. क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली मौखिक भाषा क्या कहलाती है?

उत्तर– क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली मौखिक भाषा बोली कहलाती हैं।

४. पूरे राष्ट्र में प्रयोग की जाने वाली भाषा क्या कहलाती है?

उत्तर– राष्ट्रभाषा कहलाती है।

५. कंप्यूटर पर ई-मेल करना भाषा का कौन–सा रूप कहलाता है?

उत्तर– लिखित भाषा।

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