लिपि और भाषा में अंतर

Lipi aur Bhasha mai antar in hindi grammar

मनुष्य एक समाज में रहता है। चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, लिंग, अनुपात आदि का हो, मनुष्य समाज में ही रहता है। उसे अपने मन के भावों और विचारों को दूसरों के सामने प्रकट करना होता है। किसी भी चीज को बोलने, दूसरों से काम करवाने के लिए मनुष्य को बोलने की जरूरत होती है। इसके लिए उसे भाषा की आवश्यकता होती है। इस कार्य के लिए उसके मुंह से उच्चारित ध्वनियों में आवश्यक जोड़-तोड़ करके जो ध्वनि–संकेत विकसित किए, उनसे भाषा का मौखिक रूप बना। हजारों वर्षों तक भाषा मौखिक रूप में ही फलती–फूलती रही। विकास–क्रम में ध्वनि–संकेतों के लिए लिखित चिन्हों का व्यवहार होने लगा। विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में बंटे अलग-अलग मानव समुदाय में अलग-अलग भाषाओं का विकास हुआ। भाषा के विकास की यह प्रक्रिया निरंतर चलती रही, जिस कारण एक ही भौगोलिक क्षेत्र में अलग-अलग कालो में विभिन्न भाषाओं का प्रचलन होता रहा। उदाहरण के लिए– वैदिक, संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश और हिंदी अलग-अलग कालखंडों में भारतवर्ष की भाषाएं रही है। अभिव्यक्ति का यही साधन भाषा कहलाया।

भाषा:– मन के भावों तथा विचारों का आदान–प्रदान करने का माध्यम ही भाषा कहलाता है। अपने मन की बात को दूसरों के सामने प्रकट करना, अपनी बात रखना, सलाह देना आदि भाषा है।

भाषा के रूप

भाषा के मुख्य रूप से दो रूप होते हैं–
१. मौखिक भाषा
२. लिखित भाषा।

१. मौखिक भाषा– मुख से बोलकर अपने मन के भावों को प्रकट करना तथा सुनकर दूसरों के मन के भावों को समझना ही मौखिक भाषा है। भाषा का मौखिक रूप प्राचीनतम है। यह रूप सहज होता है इसका प्रयोग व्यापक रूप में किया जाता है; जैसे– माताजी कहानी सुना रही है। ऐसी हर कोई बात हम इशारे से नहीं बता सकते, अपनी बातों को बताने के लिए हमें मुख की आवश्यकता होती है। मुंह से हम अपनी सारी बातें दूसरों के सामने प्रकट करते हैं, वह हमारी बातों को सुनते हैं और उसका समाधान भी करते हैं। इसलिए मौखिक भाषा का उपयोग व्यापक रूप में किया जाता है।

२. लिखित भाषा– लिखकर अपने मन के भावों को प्रकट करना तथा पढ़कर दूसरे के मन के भावों को समझना ही लिखित भाषा है; जैसे– राहुल कंप्यूटर पर ई-मेल कर रहा है।
ऐसी अनेक बातें हैं जिसे हम बोलकर दूसरों को नहीं बता सकते। जैसे– अगर मेरी नानी दूसरे शहर में रहती है और मुझे उनसे बातें करनी है। उसके लिए मुझे अपनी नानी को चिट्ठी लिखनी होगी। चिट्ठी के माध्यम से मेरी नानी मेरी बातों को पढ़ और समझ सकेंगी।

अगर आज के जमाने की बात की जाए तो आज तो सभी के पास मोबाइल फोन आ गया है। मोबाइल फोन के माध्यम से आमने-सामने सभी से बात हो जाती है। और अगर पिछले जमाने की बात की जाए तो पहले के जमाने में ऐसा कुछ भी नहीं होता था। दूर के रिश्तेदारों से बात करने के लिए चिट्ठी लिखनी होती थी। इसलिए लिखित भाषा भी मनुष्य के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

किसी भाव, विचार या ज्ञान को सुरक्षित और स्थाई रूप प्रदान करने के लिए लिखित भाषा का प्रयोग किया जाता है। यह रूप मौखिक रूप की अपेक्षा सीमित होता है।

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