Class 7 Science Chapter- 4 धातुओं और अधातुओं का संसार Question and Answers New Updated Syllabus NCERT Solutions

Class 7 Science Chapter- 4 Dhaatuon aur Adhatuon ka Sansar Question and Answers New Updated Syllabus NCERT Solutions

आइए, और अधिक सीखें Page no: 55

प्रश्न 1. किस धातु का उपयोग खाद्य पदार्थों के संवेष्टन (पैकेजिंग) के लिए सामान्यतः किया जाता है क्योंकि यह धातु सस्ती है और इसकी पतली चादरों को सरलता से किसी भी आकार में मोड़ा जा सकता है?

(i) ऐलुमिनियम

(ii) ताँबा

(iii) लोहा

(iv) सोना

उत्तर: (i) ऐलुमिनियम
ऐलुमिनियम का उपयोग खाद्य पदार्थों के पैकेजिंग में किया जाता है क्योंकि यह सस्ती होती है और इसकी पतली चादरों को आसानी से किसी भी आकार में मोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-सी धातु जल के संपर्क में आने पर आग पकड़ लेती है?

(i) ताँबा

(ii) ऐलुमिनियम

(iii) जिंक

(iv) सोडियम

उत्तर:  (iv) सोडियम

सोडियम एक ऐसी धातु है जो जल के संपर्क में आने पर तीव्रता से प्रतिक्रिया करती है और आग पकड़ लेती है। 

प्रश्न 3. कारण सहित बताएँ कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य।

(i) पात्रों और मूर्तियों को बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली अधातुओं के उदाहरण ऐलुमिनियम और ताँबा हैं।

उत्तर: सत्य, पात्रों और मूर्तियों को बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली अधातुओं के उदाहरण ऐलुमिनियम और ताँबा हैं।
कारण: ऐलुमिनियम और ताँबा दोनों हल्के और द्युतिमय होते हैं, जिससे इन्हें विभिन्न आकारों में ढाला जा सकता है।

(ii) धातुएँ ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऑक्साइड बनाती हैं जिनका विलयन नीले लिटमस पत्र को लाल में परिवर्तित कर देता है।

उत्तर: सत्य: धातुएँ ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऑक्साइड बनाती हैं जिनका विलयन नीले लिटमस पत्र को लाल में परिवर्तित कर देता है।

कारण: धातु ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय होते हैं, जो लिटमस पत्र को लाल करते हैं। 

(iii) श्वसन के लिए ऑक्सीजन एक अनिवार्य अधातु है।

उत्तर: असत्य: श्वसन के लिए ऑक्सीजन एक अनिवार्य अधातु है।

कारण: ऑक्सीजन एक गैस है, न कि अधातु। यह जीवन के लिए आवश्यक है, लेकिन इसे अधातु नहीं माना जाता। 

(iv) ताँबे के पात्रों का उपयोग जल उबालने के लिए किया जाता है क्योंकि वे विद्युत के सुचालक हैं।

उत्तर: सत्य: ताँबे के पात्रों का उपयोग जल उबालने के लिए किया जाता है क्योंकि वे विद्युत के सुचालक हैं।

कारण: ताँबा एक अच्छा विद्युत चालक है, जिससे यह जल को जल्दी गर्म करता है। 

प्रश्न 4. आभूषण बनाने के लिए केवल कुछ ही ही धातुएँ उपयुक्त क्यों हैं?

उत्तर: आभूषण बनाने के लिए केवल कुछ ही धातुएँ उपयुक्त होती हैं, इसके कई कारण हैं: 

1. आकर्षकता: कुछ धातुएँ, जैसे सोना और चाँदी, अपनी चमक और रंग के कारण बहुत आकर्षक होती हैं। ये धातुएँ आभूषणों में विशेष रूप से पसंद की जाती हैं क्योंकि वे देखने में सुंदर लगती हैं।

2. गुण: सोना और चाँदी जैसे धातुओं में उच्च आघातवर्धनीयता होती है, जिससे इन्हें आसानी से पतले आकार में ढाला जा सकता है। इसके अलावा, ये धातुएँ जंग नहीं लगतीं, जिससे आभूषण लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।

3. रासायनिक स्थिरता: कुछ धातुएँ, जैसे कि सोना, रासायनिक रूप से स्थिर होती हैं और वातावरण में ऑक्सीजन या नमी के संपर्क में आने पर क्षतिग्रस्त नहीं होतीं। यह उन्हें आभूषणों के लिए आदर्श बनाता है।

4. सांस्कृतिक महत्व: विभिन्न संस्कृतियों में सोना और चाँदी का विशेष महत्व होता है। ये धातुएँ न केवल सौंदर्य के लिए, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के रूप में भी उपयोग की जाती हैं।

प्रश्न 5. स्तंभ I में दी गई धातुओं और अधातुओं के उपयोगों को स्तंभ II में दिए गए धातुओं और अधातुओं के अव्यवस्थित नामों से सुमेलित कीजिए।

उत्तर: 

स्तंभ I (उपयोग)स्तंभ II (धातु/अधातु)
(क) विद्युत तारों में उपयोग(i) ताँबा
(ख) प्रबल आघातवर्धनीय और तन्य(ii) लोहे
(ग) जीव इसके बिना जीवित नहीं रह सकते हैं(iii) ऑक्सीजन
(घ) जब मिट्टी में इस उर्वरक को मिलाया जाता है तब पौधे स्वस्थ रूप से वृद्धि करते हैं(iv) नाइट्रोजन
(ङ) जल-शुद्धिकरण में इसका उपयोग किया जाता है(v) क्लोरीन

प्रश्न 6. क्या होता है जब ऑक्सीजन, मैग्नीशियम और सल्फर के साथ अभिक्रिया करती है? निर्मित उत्पादों की प्रकृति में प्रमुख अंतर क्या होता है?

उत्तर: जब ऑक्सीजन, मैग्नीशियम और सल्फर के साथ अभिक्रिया करते हैं, तो निम्नलिखित उत्पाद बनते हैं:-  

1. मैग्नीशियम और ऑक्सीजन: जब मैग्नीशियम ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) बनाता है। यह एक सफेद पाउडर के रूप में होता है और क्षारीय प्रकृति का होता है।

उत्पाद की प्रकृति में प्रमुख अंतर:-  मैग्नीशियम ऑक्साइड: 

1. प्रकृति: क्षारीय

2. स्थिति: ठोस (पाउडर के रूप में)

3. उपयोग: इसका उपयोग विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है।

2. सल्फर और ऑक्सीजन: सल्फर जब ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) बनाता है। यह गैस अम्लीय प्रकृति की होती है और जल में घुलने पर सल्फ्यूरिक एसिड बनाती है।

उत्पाद की प्रकृति में प्रमुख अंतर:- सल्फर डाइऑक्साइड: 

1. प्रकृति: अम्लीय

2. स्थिति: गैस

3. उपयोग: इसका उपयोग जल शोधन और खाद्य संरक्षण में किया जाता है।

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प्रश्न 7. निम्नलिखित प्रवाह चित्र को पूरा कीजिए।

उत्तर: 

प्रश्न 8. आपको निम्नलिखित सामग्रियाँ दी गई हैं। उनमें से जल उबालने हेतु पात्र बनाने के लिए आप किस सामग्री का चयन सबसे उपयुक्त समझते हैं और क्यों? चर्चा कीजिए।

लोहा    ताँबा    सल्फर   कोयला    प्लास्टिक    लकड़ी    गत्ता

उत्तर: हम सामग्री ताँबा (Copper) का चयन करेंगे क्योंकि:- 

1. उच्च ताप चालकता: ताँबा एक उत्कृष्ट ऊष्मा चालक है, जिसका अर्थ है कि यह गर्मी को बहुत तेजी से संचारित करता है। इससे जल को जल्दी उबालने में मदद मिलती है।

2. धात्विक गुण: ताँबा धातु है, जो कि कठोर और दृढ़ होता है, जिससे यह लंबे समय तक टिकाऊ रहता है। यह जल उबालने के लिए आवश्यक तापमान को सहन कर सकता है।

3. रासायनिक स्थिरता: ताँबा जल में घुलकर कोई हानिकारक रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करता है, जिससे यह खाद्य सुरक्षा के लिए सुरक्षित है।

4. आधुनिक उपयोग: रसोई में ताँबे के बर्तन आमतौर पर उपयोग किए जाते हैं, जैसे कि ताँबे के बर्तन में खाना पकाना, क्योंकि यह न केवल कार्यात्मक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

अन्य सामग्रियों का विश्लेषण: 

– लोहा: यह भी एक अच्छा विकल्प है, लेकिन यह जंग लगने की प्रवृत्ति रखता है, जिससे यह जल में अवांछित तत्व छोड़ सकता है।

– सल्फर: यह जल उबालने के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि यह धातु नहीं है और उच्च तापमान पर जलने पर हानिकारक गैसें उत्पन्न कर सकता है।

– कोयला: यह जल उबालने के लिए नहीं है, क्योंकि यह जल को सीधे गर्म नहीं करता है, बल्कि इसे जलाने के लिए उपयोग किया जाता है।

– प्लास्टिक: यह उच्च तापमान पर पिघल सकता है और जल उबालने के लिए उपयुक्त नहीं है।

– लकड़ी: यह जल को सीधे गर्म नहीं कर सकती, बल्कि इसे जलाने के लिए उपयोग किया जाता है।

– गत्ता: यह जल उबालने के लिए असुरक्षित है, क्योंकि यह जलने पर हानिकारक धुएँ उत्पन्न कर सकता है।

प्रश्न 9. आपको लोहे की तीन कीलें दी गईं हैं जिनमें से प्रत्येक कील क्रमशः तेल, जल और सिरके में डूबी हुई है। लोहे की कौन-सी कील में जंग नहीं लगेगा और क्यों?

उत्तर: लोहे की कील जो तेल में डूबी हुई है, उसमें जंग नहीं लगेगा। इसका कारण यह है कि तेल की परत लोहे को वायु और जल से अलग करती है, जिससे ऑक्सीजन और नमी का संपर्क नहीं हो पाता। जंग लगने की प्रक्रिया के लिए वायु (ऑक्सीजन) और पानी दोनों की उपस्थिति आवश्यक होती है। जबकि, जल और सिरके में डूबी हुई कीलें जंग लगने के लिए अधिक संवेदनशील होंगी, क्योंकि ये दोनों ही तत्व ऑक्सीजन के संपर्क में आते हैं।

प्रश्न 10. धातुओं एवं अधातुओं के विभिन्न गुणों के आधार पर उनके उपयोग को दैनिक जीवन में कैसे निर्धारित किया जाता है?

उत्तर: धातुओं और अधातुओं के विभिन्न गुणों के आधार पर उनके उपयोग को निम्नलिखित तरीके से निर्धारित किया जाता है:-

1. धातुओं की द्युतिमयता: धातुएँ आमतौर पर द्युतिमय होती हैं, इसलिए इनका उपयोग विद्युत तारों और उपकरणों में किया जाता है।

2. ऊष्मा का चालन: धातुएँ ऊष्मा को अच्छी तरह से संचालित करती हैं, इसलिए इन्हें खाना पकाने के बर्तनों में इस्तेमाल किया जाता है।

3. आघातवृध्यता और तन्यता: धातुएँ आघातवृधनीय होती हैं, जिससे इन्हें चादरों और तारों के रूप में ढाला जा सकता है। उदाहरण के लिए, अल्यूमिनियम पत्रक का उपयोग खाद्य वस्तुओं के पैकेजिंग में किया जाता है।

4. भंगुरता: अधातुओं में भंगुरता होती है, जैसे सल्फर, जो कि टूटकर छोटे टुकड़ों में बंट जाती हैं। इसलिए, इनका उपयोग ऐसे स्थानों पर नहीं किया जाता जहाँ कठोरता की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 11. लोहे को जंग लगने से बचाने के उपायों में से एक है कि उस पर जिंक धातु की एक पतली परत चढ़ाई जाए। चूँकि सल्फर जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता है तो क्या इसका उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

उत्तर: सल्फर का उपयोग लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए नहीं किया जा सकता है। इसका कारण यह है कि सल्फर जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता, लेकिन यह ऑक्सीजन के संपर्क में आकर अन्य रासायनिक प्रतिक्रियाएँ कर सकता है। जिंक धातु की एक पतली परत चढ़ाने से लोहे की सतह पर एक सुरक्षात्मक परत बनती है, जो ऑक्सीजन और नमी से संपर्क को रोकती है। इसलिए, जिंक का उपयोग जंग से बचाने के लिए अधिक प्रभावी है। 

प्रश्न 12. एक लोहार उपकरण बनाने से पूर्व लोहे को गरम करता है। इस प्रक्रिया में गरम करना क्यों आवश्यक है?

उत्तर: लोहार उपकरण बनाने से पूर्व लोहे को गरम करना आवश्यक है क्योंकि गरम करने से लोहा अधिक लचीला और कार्य करने में आसान हो जाता है। गरम करने पर लोहा अपनी कठोरता खो देता है और इसे आसानी से आकार दिया जा सकता है। इसके अलावा, गरम लोहा पीटने पर चपटा हो जाता है, जिससे विभिन्न उपकरणों का निर्माण करना संभव होता है। इस प्रक्रिया को “फोर्जिंग” कहा जाता है, जो धातु कार्य में एक महत्वपूर्ण तकनीक है। 

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