कक्षा 10 विज्ञान – अध्याय 8 आनुवंशिकता प्रश्न – उत्तर  New Syllabus Updated NCERT Solutions

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प्रश्न 1. यदि एक ‘लक्षण-A’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि के 10 प्रतिशत सदस्यों में पाया जाता है तथा ‘लक्षण-B’ उसी समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है, तो कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न हुआ होगा?

उत्तर: ‘लक्षण-B’ पहले उत्पन्न हुआ होगा। चूँकि यह 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है, इसका अर्थ है कि इस लक्षण को उत्पन्न होने के लिए अधिक समय मिला, जिससे यह अधिक सदस्यों तक फैल सका। ‘लक्षण-A’ केवल 10 प्रतिशत में है, अतः यह बाद में उत्पन्न हुआ होगा।

प्रश्न 2. विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ जाता है?

उत्तर: विभिन्नताओं के कारण स्पीशीज के कुछ सदस्य ऐसे लक्षण रख सकते हैं जो परिवर्तित परिस्थितियों (जैसे तापमान में वृद्धि, खाद्य संसाधनों का परिवर्तन) में उत्तरजीविता की संभावना बढ़ा देते हैं। यदि परिस्थितियाँ अनुकूल न रहें तो केवल विभिन्नता रखने वाले जीव बचे रहते हैं और स्पीशीज का अस्तित्व बना रहता है।

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प्रश्न 1. मेंडल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं?

उत्तर: मेंडल ने लंबे और बौने मटर के पौधों का संकरण कराया। F₁ पीढ़ी में सभी पौधे लंबे प्राप्त हुए — कोई भी बौना या बीच की ऊँचाई का नहीं। इससे पता चला कि ‘लंबाई’ लक्षण प्रभावी है तथा ‘बौनेपन’ का लक्षण अप्रभावी है, जो F₁ में छिपा रहा। F₁ पौधों के स्वपरागण से F₂ पीढ़ी में लंबे और बौने पौधे 3:1 अनुपात में प्राप्त हुए, जिससे सिद्ध हुआ कि अप्रभावी लक्षण लुप्त नहीं होता, केवल व्यक्त नहीं होता।

प्रश्न 2. मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं?

उत्तर: मेंडल ने गोल-बीज वाले लंबे पौधों का झुर्रीदार-बीज वाले बौने पौधों से संकरण कराया। F₁ में सभी पौधे लंबे और गोल-बीज वाले थे। F₂ पीढ़ी में केवल मूल संयोजन (लंबा-गोल, बौना-झुर्रीदार) ही नहीं मिले, बल्कि नए संयोजन — लंबे-झुर्रीदार बीज तथा बौने-गोल बीज वाले पौधे भी प्राप्त हुए (लगभग 9:3:3:1 अनुपात में, चित्र 8.5: 315 गोल-पीले, 108 गोल-हरे, 101 झुर्रीदार-पीले, 32 झुर्रीदार-हरे)। इससे सिद्ध हुआ कि दोनों लक्षण एक-दूसरे से संबद्ध नहीं हैं और स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं।

प्रश्न 3. एक ‘A-रुधिर वर्ग’ वाला पुरुष एक स्त्री जिसका रुधिर वर्ग ‘O’ है, से विवाह करता है। उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग ‘O’ है। क्या यह सूचना पर्याप्त है यदि आपसे कहा जाए कि कौन-सा विकल्प लक्षण — रुधिर वर्ग ‘A’ अथवा ‘O’ — प्रभावी लक्षण हैं? अपने उत्तर का स्पष्टीकरण दीजिए।

उत्तर: नहीं, यह सूचना पर्याप्त नहीं है। यदि ‘A’ प्रभावी हो तो पिता की आनुवंशिक संरचना IAi i (वाहक) हो सकती है और माता ii — तब पुत्री को ii मिलकर रुधिर वर्ग ‘O’ हो सकता है। इसके विपरीत यदि ‘O’ प्रभावी मान लिया जाए, तब भी ऐसे संयोजन की कल्पना की जा सकती है। अतः केवल इसी सूचना से यह निर्णय नहीं किया जा सकता कि ‘A’ अथवा ‘O’ में से कौन-सा लक्षण प्रभावी है।

प्रश्न 4. मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता है?

उत्तर: मानव में लिंग निर्धारण आनुवंशिक आधार पर होता है। स्त्री में लिंग सूत्र ‘XX’ तथा पुरुष में ‘XY’ होते हैं। माता के अंडाणु में सदैव ‘X’ गुणसूत्र होता है, जबकि पिता के शुक्राणु में आधे ‘X’ तथा आधे ‘Y’ होते हैं। बच्चे को माता से सदैव ‘X’ मिलता है। यदि पिता से ‘X’ गुणसूत्र मिले तो संतान लड़की (XX) होगी और यदि ‘Y’ मिले तो लड़का (XY) होगा। अतः बच्चे का लिंग पिता से प्राप्त गुणसूत्र पर निर्भर करता है।

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प्रश्न 1. मेंडल के एक प्रयोग में लंबे मटर के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधों जिनके सफेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के सभी पौधों में पुष्प बैंगनी रंग के थे। परंतु उनमें से लगभग आधे बौने थे। इससे कहा जा सकता है कि लंबे जनक पौधों की आनुवंशिक रचना निम्नलिखित थी— 

(a) TTWW (b) TTww (c) TtWW (d) TtWw

उत्तर: सही विकल्प — (d) TtWw

स्पष्टीकरण: संतति में बौने पौधे (tt) प्राप्त हुए, अतः लंबे जनक में t जीन अवश्य होगा, अर्थात वह Tt है। चूँकि संतति के सभी पुष्प बैंगनी थे (कोई सफेद नहीं), लंबे जनक में दोनों ‘W’ जीन होंगे, अर्थात WW। अतः रचना TtWw है।

प्रश्न 2. एक अध्ययन से पता चला कि हल्के रंग की आँखों वाले बच्चों के जनक (माता-पिता) की आँखें भी हल्के रंग की होती हैं। इसके आधार पर क्या हम कह सकते हैं कि आँखों के हल्के रंग का लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: हल्के रंग की आँखों का लक्षण अप्रभावी होना चाहिए। यदि यह प्रभावी होता, तो हल्की आँखों वाले जनकों (जिनमें यह लक्षण अप्रभावी जीन के रूप में छिपा रह सकता था) के बच्चों में यह लक्षण इस प्रकार सुसंगत रूप से दिखाई नहीं देता। हल्की आँखें केवल तब व्यक्त होती हैं जब दोनों जनकों से अप्रभावी जीन मिले — इसीलिए हल्की आँखों वाले जनकों के बच्चों में यह लक्षण पुनः दिखाई देता है।

प्रश्न 3. कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग ज्ञात करने के उद्देश्य से एक प्रोजेक्ट बनाइए।

उत्तर (नमूना प्रोजेक्ट):

  1. काले रंग तथा भूरे रंग की खाल वाले शुद्ध नस्ल के कुत्तों का चयन करें (मान लीजिए काला = संभावित प्रभावी, भूरा = अप्रभावी)।
  2. इनका परस्पर संकरण कराएँ तथा F₁ संतति के रंग का अवलोकन करें।
  3. यदि F₁ के सभी सदस्य काले हैं, तो काला रंग प्रभावी है।
  4. F₁ सदस्यों के परस्पर संकरण से F₂ प्राप्त करें; यदि F₂ में काले तथा भूरे लगभग 3:1 अनुपात में मिलें, तो यह पुष्टि होगी कि काला रंग प्रभावी तथा भूरा अप्रभावी है।
  5. प्रत्येक पीढ़ी के रंगों की गणना का रिकॉर्ड रखें (जैसा मेंडल ने किया था)।

प्रश्न 4. संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है।

उत्तर: प्रत्येक जीन की दो प्रतिकृतियाँ होती हैं — एक माता से तथा दूसरी पिता से। सामान्य कायिक कोशिकाओं में जीन के दो सेट (प्रत्येक गुणसूत्र की दो प्रतिकृतियाँ) होते हैं, परंतु जनन कोशिकाओं (युग्मकों) के निर्माण के समय गुणसूत्रों के प्रत्येक जोड़े का केवल एक गुणसूत्र ही युग्मक में जाता है। अतः प्रत्येक जनक अपने जीनों का केवल एक-एक सेट ही संतति को देता है। निषेचन के समय दोनों युग्मकों के संलयन से गुणसूत्रों की संख्या पुनः सामान्य हो जाती है। इस प्रकार नर तथा मादा जनकों का आनुवंशिक योगदान बराबर (अर्धा-अर्धा) होता है।

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