कक्षा 10 विज्ञान – अध्याय 8 आनुवंशिकता 20 अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर

प्र: 1.  आनुवंशिकता किसे कहते हैं? 

उत्तर: जनन प्रक्रम द्वारा जनकों से संतति में लक्षणों के संचारण को आनुवंशिकता कहते हैं। इसी कारण संतति का शारीरिक डिज़ाइन जनकों के समान होता है।

प्र: 2.  अलैंगिक जनन में विभिन्नताएँ कम क्यों होती हैं? 

उत्तर: अलैंगिक जनन में केवल एक ही जीव जनन करता है (जैसे जीवाणु का विभाजन), इसलिए विभिन्नताएँ केवल DNA प्रतिकृति के समय होने वाली न्यून त्रुटियों के कारण ही उत्पन्न होती हैं। लैंगिक जनन में विविधता अपेक्षाकृत अधिक होती है।

प्र: 3.  मेंडल ने अपने प्रयोगों के लिए मटर के पौधे ही क्यों चुने? (पाठ्य के आधार पर) 

उत्तर: मटर के पौधों में अनेक स्थूल रूप से दिखाई देने वाले विपर्यासी (विकल्पी) लक्षण होते हैं, जैसे गोल/झुर्रीदार बीज, लंबे/बौने पौधे, सफेद/बैंगनी फूल। साथ ही मेंडल ने अपने विज्ञान एवं गणितीय ज्ञान को मिलाकर प्रत्येक पीढ़ी के लक्षणों का रिकॉर्ड रखा और गणना की, जिससे वंशागत नियमों के प्रतिपादन में सहायता मिली।

प्र: 4.  प्रभावी और अप्रभावी लक्षण किसे कहते हैं? 

उत्तर: जब किसी लक्षण के दो प्रतिरूप एकसमान न हों, तो जो लक्षण व्यक्त होता है वह प्रभावी (जैसे ‘T’) कहलाता है, और जो व्यक्त नहीं हो पाता वह अप्रभावी (जैसे ‘t’) कहलाता है।

प्र: 5.  जीन क्या है? 

उत्तर: DNA का वह भाग जिसमें किसी प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचना होती है, उस प्रोटीन का जीन कहलाता है।

प्र: 6.  मेंडल के द्विसंकरण प्रयोग के F₂ अनुपात को समझाइए। 

उत्तर: गोल-पीले और झुर्रीदार-हरे बीजों के संकरण में F₂ में 556 बीज इस प्रकार प्राप्त हुए:

  • गोल, पीले बीज — 315
  • गोल, हरे बीज — 108
  • झुर्रीदार, पीले बीज — 101
  • झुर्रीदार, हरे बीज — 32

यह लगभग 9:3:3:1 का अनुपात है। नए संयोजनों (गोल-हरा, झुर्रीदार-पीला) के प्राप्त होने से सिद्ध हुआ कि बीज की आकृति और रंग को नियंत्रित करने वाले कारक स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं और युग्मनज बनते समय पुनर्संयोजित हो जाते हैं।

प्र: 7.  गुणसूत्र की संरचना वंशागति की क्रियाविधि को कैसे समझाती है? 

उत्तर: जीन सेट केवल एक DNA शृंखला के रूप में नहीं होता; जीन DNA के अलग-अलग स्वतंत्र भागों में होते हैं, प्रत्येक को गुणसूत्र कहलाता है। प्रत्येक कोशिका में प्रत्येक गुणसूत्र की दो प्रतिकृतियाँ होती हैं — एक नर तथा दूसरी मादा जनक से। जनन कोशिका में प्रत्येक जोड़े का केवल एक गुणसूत्र जाता है। युग्मकों के संलयन पर गुणसूत्रों की संख्या पुनः सामान्य हो जाती है। इसी क्रियाविधि से मेंडल के प्रयोगों के परिणामों की व्याख्या होती है। अलैंगिक जनन वाले जीव भी वंशागति के यही नियम पालन करते हैं।

प्र: 8.  मानव में लिंग निर्धारण कैसे होता है? सचित्र समझाइए। 

उत्तर: मानव में 22 जोड़े गुणसूत्र युग्मित होते हैं, परंतु लिंग सूत्र का जोड़ा सदा पूर्ण नहीं होता — स्त्री में XX तथा पुरुष में XY (एक सामान्य X और एक छोटा Y)। सभी बच्चे माता से X गुणसूत्र प्राप्त करते हैं। अतः लिंग निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि पिता से कौन-सा गुणसूत्र मिला — X मिलने पर लड़की (XX) तथा Y मिलने पर लड़का (XY)। सामान्यतः आधे बच्चे लड़के तथा आधे लड़कियाँ हो सकते हैं।

प्र: 9. क्या विभिन्न स्पीशीज़ में लिंग निर्धारण की विधि एकसमान है? 

उत्तर: नहीं। विभिन्न स्पीशीज़ अलग-अलग युक्तियाँ अपनाते हैं:

  • कुछ प्राणियों (जैसे कुछ सरीसृप) में लिंग निषेचित अंडे के ऊष्मायन तापमान पर निर्भर करता है।
  • घोंघे जैसे कुछ प्राणी अपना लिंग बदल सकते हैं — यह संकेत है कि उनमें लिंग निर्धारण आनुवंशिक नहीं है।
  • मानव में लिंग निर्धारण पूर्णतः आनुवंशिक आधार पर होता है।

प्र: 10. संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित होती है? 

उत्तर: माता एवं पिता दोनों ही समान मात्रा में आनुवंशिक पदार्थ संतति में स्थानांतरित करते हैं। प्रत्येक जनक अपने जीनों का एक-एक सेट (प्रत्येक गुणसूत्र-जोड़े का एक गुणसूत्र) युग्मक द्वारा देता है। युग्मनज के निर्माण पर दोनों जनकों का योगदान बराबर होता है, इसलिए प्रत्येक लक्षण के लिए संतति में दो विकल्प होते हैं।

प्र: 11. कर्णपालि (ear lobe) के प्रेक्षण से वंशागति का क्या नियम सुझाया जा सकता है? 

उत्तर: कक्षा में छात्रों के कानों का अवलोकन करने पर पाया जाता है कि कुछ लोगों में कर्णपालि सिर के पार्श्व में पूर्ण रूप से जुड़ी होती है और कुछ में स्वतंत्र होती है। ये मानव समष्टि में पाए जाने वाले दो परिवर्त हैं। छात्रों की कर्णपालि का प्रकार जनकों के प्रकार से मिलाने पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह लक्षण मेंडलीय पैटर्न (प्रभावी/अप्रभावी विकल्प) के अनुसार वंशानुगत होता है।

प्र: 12. मेंडल के एक प्रयोग में लंबे बैंगनी-पुष्प वाले पौधों का संकरण बौने सफेद-पुष्प वाले पौधों से कराया गया। संतति के सभी पौधे बैंगनी-पुष्प वाले थे, परंतु उनमें से लगभग आधे बौने थे। लंबे जनक पौधे की आनुवंशिक रचना क्या थी? 

उत्तर: (c) TtWW — चूँकि लगभग आधी संतति बौनी है, लंबे जनक में ऊँचाई हेतु विकल्पी जोड़ा (Tt) होना चाहिए; और चूँकि सभी संतति बैंगनी-पुष्प हैं, फूल के रंग हेतु जनक शुद्ध (WW) होना चाहिए। अतः रचना TtWW होगी।

प्र: 13. एक अध्ययन से पता चला कि हल्के रंग की आँखों वाले बच्चों के जनकों की आँखें भी हल्के रंग की होती हैं। क्या इस आधार पर हम कह सकते हैं कि आँखों का हल्का रंग प्रभावी है या अप्रभावी? 

उत्तर: इस आधार पर हम कह सकते हैं कि आँखों का हल्का रंग अप्रभावी लक्षण है। यदि यह प्रभावी होता, तो हल्की आँखों वाले बच्चों को यह लक्षण तब भी व्यक्त हो सकता था जब जनकों में से किसी एक में यह लक्षण न हो (वाहक होने पर भी प्रभावी लक्षण छिपा नहीं रहता)। यहाँ हल्का रंग केवल तब व्यक्त होता है जब दोनों जनकों में यह लक्षण हो — जो अप्रभावी लक्षण की पहचान है (जैसे tt में ही बौनापन व्यक्त होता है)।

प्र: 14. विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ता है? 

उत्तर: प्रकृति की विविधता के आधार पर विभिन्न जीवों को विभिन्न प्रकार के लाभ मिलते हैं। जैसे ऊष्मा सहन करने की क्षमता वाले जीवाणुओं को अधिक गर्मी से बचने की संभावना अधिक होती है। इस प्रकार विभिन्नताएँ जीव की उत्तरजीविता बढ़ाती हैं।

प्र: 15. यदि अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि में लक्षण A 10% सदस्यों में तथा लक्षण B 60% जीवों में पाया जाता है, तो कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न हुआ होगा? 

उत्तर: लक्षण B, क्योंकि अलैंगिक जनन में विभिन्नताएँ समय के साथ संचित होती हैं; जो लक्षण अधिक सदस्यों में पाया जाता है, वह अधिक पीढ़ियों पहले उत्पन्न हुआ होगा।

प्र: 16.  F₁ पीढ़ी में सभी पौधे लंबे क्यों थे? 

उत्तर: जब शुद्ध लंबे (TT) और शुद्ध बौने (tt) पौधों का संकरण कराया, तो F₁ में सभी संतति Tt थीं। चूँकि ‘T’ प्रभावी है, इसलिए केवल लंबाई का लक्षण व्यक्त हुआ; दोनों लक्षणों का मिश्रित प्रभाव दृष्टिगोचर नहीं हुआ और कोई पौधा बीच की ऊँचाई का नहीं था।

प्र: 17.  F₂ पीढ़ी में 3:1 अनुपात क्यों प्राप्त होता है? 

उत्तर: F₁ पौधे (Tt) के स्वपरागण से F₂ में TT, Tt, Tt और tt संयोजन 1:2:1 अनुपात में प्राप्त होते हैं। TT और Tt लंबे हैं जबकि केवल tt बौना है, इसलिए लंबे : बौने = 3 : 1 प्राप्त होता है।

प्र: 18. जीन लक्षणों को किस प्रकार नियंत्रित करते हैं? (पौधे की लंबाई का उदाहरण दें) 

उत्तर: पौधों में हार्मोन लंबाई को नियंत्रित करते हैं। हार्मोन की मात्रा उस एंज़ाइम (प्रोटीन) की दक्षता पर निर्भर करती है जो उसके निर्माण में सहायक है। यदि उस प्रोटीन के जीन में परिवर्तन हो जाए, तो प्रोटीन कम दक्ष होगी → हार्मोन कम बनेगा → पौधा बौना होगा। इस प्रकार जीन प्रोटीन के माध्यम से लक्षणों को नियंत्रित करते हैं।

प्र: 19. लक्षणों की स्वतंत्र वंशानुगति का क्या प्रमाण मिला? 

उत्तर: जब गोल बीजों वाले लंबे पौधों का झुर्रीदार बीजों वाले बौने पौधों से संकरण कराया गया, तो F₁ के सभी पौधे लंबे एवं गोल-बीज वाले थे। परंतु F₂ में मूल जनकों जैसे संयोजनों के अतिरिक्त नए संयोजन (लंबे-झुर्रीदार तथा बौने-गोल बीज) भी प्राप्त हुए। इससे सिद्ध हुआ कि लंबे/बौने तथा गोल/झुर्रीदार लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं।

प्र: 20. जनन कोशिका (युग्मक) में जीनों का एक सेट ही क्यों होता है? 

उत्तर: चूँकि संतति को दोनों जनकों से एक-एक सेट प्राप्त होता है, इसलिए प्रत्येक जनन कोशिका में जीन का केवल एक सेट होता है। दो युग्मकों के संलयन पर युग्मनज में गुणसूत्रों की संख्या पुनः सामान्य हो जाती है, जिससे स्पीशीज़ के DNA का स्थायित्व सुनिश्चित होता है।

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