Extra Questions and Answers Class 7 Science Chapter 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य –
Q1. सूर्य पूर्व में उदित और पश्चिम में अस्त क्यों प्रतीत होता है?
उत्तर: क्योंकि पृथ्वी स्वयं अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन कर रही है। हम घूमती हुई पृथ्वी से देखते हैं, इसलिए सूर्य हमें उलटी दिशा (पूर्व से पश्चिम) में गतिमान प्रतीत होता है।
Q2. चक्रीय हिंडोले का उदाहरण पृथ्वी के घूर्णन को समझाने में कैसे मदद करता है?
उत्तर: जब हम हिंडोले में वामावर्त घूमते हैं, तो आस-पास की वस्तुएँ हमें विपरीत दिशा (दक्षिणावर्त) में घूमती प्रतीत होती हैं। इसी प्रकार पृथ्वी के घूर्णन के कारण हमें सूर्य और तारे गतिमान प्रतीत होते हैं, जबकि वास्तव में पृथ्वी घूम रही है।
Q3. दिन और रात किस दिशा में पृथ्वी के घूर्णन से बनते हैं?
उत्तर: पृथ्वी अपने उत्तरी-दक्षिण अक्ष के सापेक्ष पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। इसी घूर्णन के कारण दिन-रात का चक्र चलता है।
Q4. सूर्योदय और सूर्यास्त को ग्लोब वाले क्रियाकलाप की सहायता से समझाइए।
उत्तर: जब ग्लोब को पश्चिम से पूर्व दिशा में घुमाया जाता है, तो प्रकाश (सूर्य का प्रतीक) सर्वप्रथम भारत के पूर्वी भाग पर पड़ता है — यही सूर्योदय है। जब हमारी स्थिति प्रकाशमान क्षेत्र में आती है तो सूर्योदय, और जब अँधेरे में आती है तो सूर्यास्त होता है।
Q5. भारत में सूर्योदय सर्वप्रथम कहाँ होता है और क्यों?
उत्तर: भारत के पूर्वी भाग में, क्योंकि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, इसलिए पूर्वी भाग सबसे पहले सूर्य के प्रकाश में आता है।
Q6. पृथ्वी के घूर्णन का समय कितना है और इसका अनुमान सर्वप्रथम किसने लगाया?
उत्तर: एक पूर्ण घूर्णन में लगभग 24 घंटे लगते हैं। आर्यभट ने इसका अनुमान (आधुनिक मात्रकों में) लगभग 23 घंटे 56 मिनट 4.1 सेकंड लगाया, जो आज स्वीकृत मान के बहुत निकट है।
Q7. फोको पेंडुलम क्या है और इसका उपयोग किस लिए था?
उत्तर: उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में वैज्ञानिक लीऑन फोको ने पृथ्वी के घूर्णन को प्रदर्शित करने के लिए एक लंबे लोलक का उपयोग किया; इसे फोको पेंडुलम कहते हैं। इसमें एक भारी गोलक लंबी डोरी से ऊँची छत से लटका होता है। नई संसद के संविधान सदन में 22 m लंबा फोको पेंडुलम लगाया गया है।
Q8. सप्तर्षि (बिग डिपर) की स्थिति रात में बदलती क्यों प्रतीत होती है?
उत्तर: पृथ्वी के घूर्णन के कारण। उत्तरी गोलार्ध से पृथ्वी का घूर्णन-अक्ष ध्रुव तारे के निकट बिंदु की ओर इंगित होता है, इसलिए ध्रुव तारा लगभग स्थिर प्रतीत होता है और सप्तर्षि सहित सभी तारे उसके चारों ओर घूमते हुए प्रतीत होते हैं।

Q9. परिक्रमा और कक्षा में क्या अंतर है?
उत्तर: परिक्रमा किसी वस्तु की किसी अन्य वस्तु के चारों ओर एक बंद पथ पर गति है, जबकि वह पथ (जिस पर पिंड गमन करता है) कक्षा कहलाता है।
Q10. पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूर्ण करने में कितना समय लगता है?
उत्तर: लगभग 365 दिन और 6 घंटे।
Q11. सूर्य के परितः पृथ्वी की कक्षा की आकृति कैसी है?
उत्तर: ऊपर से देखने पर यह लगभग वृत्ताकार प्रतीत होती है। (कक्षा 6 के चित्र में यह दीर्घवृत्ताकार दिखाई गई थी क्योंकि वह पार्श्व दृश्य था।)
Q12. वर्ष भर में रात्रि-आकाश के तारे बदलते क्यों रहते हैं?
उत्तर: क्योंकि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर सतत परिक्रमा करती रहती है, इसलिए हम विभिन्न दिशाओं में देखते हैं और सूर्यास्त के बाद दिखाई देने वाले तारे व तारामंडल परिवर्तित होते रहते हैं।
Q13. भील और पवार समुदाय तारों का उपयोग कैसे करते थे?
उत्तर: पश्चिम भारत की तापी घाटी के ये स्वदेशी समुदाय आकाश में कुछ तारों के पैटर्नों की उपस्थिति को मानसून की वर्षा के आगमन के संकेत के रूप में उपयोग करते थे।
Q14. ऋतु-परिवर्तन के वास्तविक कारण क्या हैं?
उत्तर: पृथ्वी के घूर्णन अक्ष का कक्षा के सापेक्ष झुका होना तथा पृथ्वी का गोलाकार होना। झुकाव के कारण जून में उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुकता है — किरणें छोटे क्षेत्र में फैलती हैं और 12 घंटे से अधिक प्रकाश मिलता है, अतः ग्रीष्म; दिसंबर में स्थिति विपरीत होने से शीत ऋतु होती है।
Q15. ऋतुओं के बारे में दो सामान्य गलत धारणाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर: (i) यह मानना कि जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुकता है तो वह सूर्य के समीप होता है;
(ii) यह मानना कि अंडाकार कक्षा के कारण पृथ्वी वर्ष भर सूर्य से भिन्न-भिन्न दूरियों पर होती है। वास्तव में दूरी का अंतर अत्यंत कम है — जनवरी में पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है।
Q16. उत्तर-अयनांत, दक्षिण-अयनांत और विषुव क्या हैं?
उत्तर: उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन लगभग 21 जून को होता है — उत्तर-अयनांत। सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात 22 दिसंबर के आस-पास — दक्षिण-अयनांत। 21 मार्च और 23 सितंबर के आस-पास दिन-रात 12–12 घंटे के होते हैं — क्रमशः वसंत विषुव एवं हेमंत विषुव।
Q17. ध्रुवीय प्रदेशों में सूर्य का प्रकाश कैसे रहता है?
उत्तर: उत्तरी ध्रुव पर 21 मार्च (विषुव दिवस) को सूर्य उदित होकर सतत छह माह तक आकाश में बना रहता है और 22 सितंबर को अस्त होता है; दक्षिणी ध्रुव पर विपरीत होता है। इस प्रकार ध्रुवीय प्रदेशों पर सतत छह माह दिन और फिर छह माह अंधकार रहता है।
Q18. विषुवत रेखा के निकट ऋतु-परिवर्तन के प्रभाव स्पष्ट क्यों नहीं होते?
उत्तर: विषुवत रेखा पर सदैव 12 घंटे प्रकाश और 12 घंटे अंधकार रहता है, तथा विभिन्न महीनों में किरणों की तीव्रता में बहुत कम अंतर होता है। अतः भारत के दक्षिणी राज्यों में ऋतु-परिवर्तन के प्रभाव बहुत स्पष्ट नहीं होते।
Q19. चंद्रमा सूर्य से बहुत छोटा होने पर भी सूर्य-ग्रहण कैसे कर पाता है?
उत्तर: क्योंकि आभासी आमाप वास्तविक आमाप और दूरी दोनों पर निर्भर करता है। चंद्रमा सूर्य की तुलना में हमारे बहुत निकट है, इसलिए पृथ्वी से दोनों के आभासी आमाप एक जैसे लगते हैं और चंद्रमा पूरे सूर्य को ढक सकता है।
Q20. शुक्र ग्रह का पारगमन क्या है? सूर्य-ग्रहण और चंद्र-ग्रहण में अंतर लिखिए।
उत्तर: जब शुक्र सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है तो सूर्य के चमकदार पृष्ठ पर एक सूक्ष्म काले धब्बे की भाँति दिखाई पड़ता है — यह दुर्लभ घटना शुक्र ग्रह का पारगमन कहलाती है। अंतर: सूर्य-ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने से रोकता है (चंद्रमा की छाया पृथ्वी के छोटे भाग पर पड़ती है; पूर्ण ग्रहण कुछ मिनटों तक)। चंद्र-ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर सूर्य की किरणों को चंद्रमा तक पहुँचने से रोकती है; पूर्ण चंद्र-ग्रहण में चंद्रमा गहरे लाल रंग का दिखता है और इसे बिना किसी उपकरण के सुरक्षित देखा जा सकता है।
अंतर्विषयक ज्ञान-टिप: सौर परिवार के ग्रह वास्तव में सूर्य के ठीक केंद्र नहीं, बल्कि एक विशिष्ट बिंदु के परितः परिक्रमा करते हैं; सूर्य भी उस बिंदु के परितः स्वल्प गति करता है। वैज्ञानिक तारों की ऐसी सूक्ष्म डगमगाहटों से बाह्य ग्रहों की खोज करते हैं।
