काव्य खंड – पाठ : साखियाँ एवं सबद अभ्यास प्रश्न और उत्तर Class 9

NCERT Solutions for class 9 Hindi (kshitij) chapter – 9 sakhiyan evam shabd Questions and Answers

लेखक

कबीर (1398-1518)

(क) साखियां प्रश्न और उत्तर

पृष्ठ संख्या –

93

Question: 1 मानसरोवर से कवि का क्या अभिप्राय है?

Answer :

मानसरोवर से कवि का अभिप्राय हृदय रूपी तालाब या मनरूपी पवित्र सरोवरसे है , जो हमारे मन में स्थित है। इस मानसरोवर में स्वच्छ विचारधारा रूपी जल भरा है तथा हंस रूपी जीवात्मा प्रभु भक्ति में लीन होकर मुक्तिरूपी मुक्ताफल चुगती है अर्थात आत्मा इस सांसारिक माया मोह के चक्कर में न पड़कर ईश्वर की शरण में जाना चाहती है।

Question: 2 कवि ने सच्चे प्रेमी की क्या कसौटी बताई है?

Answer :

कवि ने सच्चे प्रेमी की कसोटी बताते हुए यह कहा है कि सच्चे प्रेमी अर्थात् “ईश्वर”। हमें ईश्वर को इधर उधर न ढूंढ कर अपने भीतर हृदय में ढूँढना चाहिए न की मंदिर , महजीद में ढूँढना चाहिए और न ही पत्थर की मूर्तियों में। ईश्वर को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि हमें उस पर विश्वास हो और उसको उस ईश्वर को पाते ही सारे विकार दूर हो जाते हैं , मन प्रसन्न हो जाता है।

Question: 3 तीसरे दोहे में कवि ने किस प्रकार के ज्ञान को महत्व दिया है?

Answer :

तीसरे दोहे में कवि ने अनुभव से प्राप्त ज्ञान को महत्त्व दिया है जो सहज साधना से प्राप्त होता है। कवीर ने इस प्रकार के ज्ञान को हस्ती के समान बताया है। इसे पाने के बाद उसका साक्षात्कार ईश्वर से सहज हो जाता है।

Question: 4 इस संसार में सच्चा संत कौन कहलाता है?

Answer :

कबीर के अनुसार सच्चा संत वही कहलाता है जो सांसारिक मोहमाया व दिखावे की भक्ति से दूर रहकर भी प्रभु की सच्ची भक्ति करता रहता है और साम्प्रदायिक भेदभाव , सांसारिक मोह माया से दूर , सभी स्थिति में स्वभाव (सुख दुःख , लाभ-हानि , ऊँच-नीच , अच्छा-बुरा) से दुर रहते हुए निश्छल भाव से प्रभु भक्ति में लीन रहता है।

Question: 5 अंतिम दो दोहों के माध्यम से कबीर ने किस तरह की संकीर्णता की ओर संकेत किया है?

Answer :

अंतिम दो दोहों में दो तरह की संकीर्णता की ओर संकेत किया है :–

(i) मुसलमान काबा को अपना पवित्र तीर्थ स्थान मानते हैं और हिंदू काशी को एक पवित्र स्थान मानते हैं और अपने धर्म को श्रेष्ठ सिद्ध करना और दूसरे के धर्म की निंदा करना।

(ii) ऊँचे कुल में जन्म लेने से स्वयं को श्रेष्ठ समझना , कोई व्यक्ति ऊँचे कुल में जन्म लेने से ही महान नहीं बन जाता है। उसके अच्छे कर्म ही उसे महान बनाते हैं।

Question: 6 किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कुल से होती है या कर्मों से?

Answer :

कुछ लोगों का यह मानना है कि कोई मनुष्य ऊँचे कुल में पैदा होने मात्र से ही वह महान बन जाता है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। राम , कृष्ण , बुद्ध , महावीर आदि महापुरूष केवल ऊँचे कुल में जन्म लेने के कारण महान नहीं बनें बल्कि वे महान बने तो अपने उच्च कर्मों से इसके विपरीत कबीर , सूर , तुलसी बहुत ही सामान्य घरों में पैदा हुए परन्तु संसार भर में अपने सहकर्मी के कारण प्रसिद्ध हुए। अंत में हम यह कह सकते हैं कि व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से होती है कुल से नहीं।

Question: 7 काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –

🔅हस्ती चढ़िए ज्ञान कौ , सहज दुलीचा डारि।
स्वान रूप संसार है , भूँकन दे झख मारि।

Answer :

🔅 भाव सौंदर्य – यहाँ पर कवि ने ज्ञान के महत्त्व को प्रतिपादित करते हुए बताया है कि ज्ञान की प्राप्ति के लिए दृढ़ता तथा सहज साधना आवश्यक है , संसार रूपी कुत्ते अर्थात् आलोचना करनेवाले भीख भौंककर शांत हो जाते हैं।

🔅 शिल्प सौंदर्य – रचना में भक्ति रस की प्रधानता है। सधुक्कड़ी भाषा दोहा छंद का प्रयोग किया गया है।

🔅 अलंकारहस्ती , स्वान , ज्ञान आदि तत्सम शब्दों तथा रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है।


(ख) सबद प्रश्न और उत्तर

प्रश्न संख्या –

93

Question: 8 मनुष्य ईश्वर को कहां-कहां ढूंढता है?

Answer :

मुसलमान काबा को अपना पवित्र तीर्थ स्थान मानते हैं और हिंदू काशी को एक पवित्र स्थान मानते हैं। मनुष्य ईश्वर को मंदिर मस्जिद , देवालयों , कावा , काशी- कैलाश जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों और योग , वैराग्य यज्ञ , पूजा-पाठ तथा विभिन्न प्रकार के धार्मिक क्रिया कलापों में खोजता फिरता है।

Question: 9 कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए किन प्रचलित क्रियाओं का खंडन किया है?

Answer :

कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए प्रचलित विश्वास जैसे मंदिर , मस्जिद में जाकर पूजा अर्चना करना था नमाज़ पढ़ना अथवा योग , वैराग्य जैसी क्रियाएँ करना , पवित्र तीर्थ स्थलों की यात्रा करना , आडम्बर युक्त भक्ति करके ईश्वर प्राप्ति की इच्छा करना इन सभी प्रचलित मान्यताओं का खंडन किया है।

Question: 10 कबीर ने ईश्वर को ‘सब स्वांसों की स्वांस’ में क्यों कहा है?

Answer :

सभी जीवों की रचना ईश्वर के द्वारा की गयी है। अतः ईश्वर का वास हर प्राणी की हर साँस में है अर्थात् ईश्वर संसार के कण-कण में समाया है। इसलिए कबीर ने ईश्वर को सब स्वाँसों की स्वाँस में कहा है।

Question: 11 कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना सामान्य हवा से न कर आँधी से क्यों की?

Answer :

सामान्य हवा में वातावरण को प्रभावित करने की क्षमता नहीं होती जबकि आँधी में व्यापक परिवर्तन की क्षमता होती है। इसी प्रकार ज्ञान रूपी आंधी के आने से मनुष्य के मन पर पड़ा हुआ अज्ञान , माया-मोहरूपी परदा हट जाता है , छल-कपट रूपी क्रूरता नष्ट हो जाती है तत्पश्चात मनुष्य का मन निर्मल होकर प्रभु भक्ति रूपी वर्षा में भीग जाता है।

Question: 12 ज्ञान की आंँधी का भक्त के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

Answer :

ज्ञान की आँधी का मनुष्य के जीवन पर यह प्रभाव पड़ता है कि उसकी सारी शंकाओं और अज्ञानता का नाश हो जाता है। वह मोह-माया के सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाता है मन पवित्र तथा निश्चल होकर प्रभु भक्ति में तल्लीन हो जाता है।

Question: 13 भाव स्पष्ट कीजिए :–

🔅 (क) हिति चित्त की द्वै थूँनी गिराँनी , मोह बलिंडा तूटा।

🔅 (ख) आँधी पीछै जो जल बूठा , प्रेम हरि जन भीनाँ।

Answer :

🔅(क) यहाँ ज्ञान रूपी आंँधी के कारण मनुष्य के मन में स्थित स्वार्थ रूपी दोनों खंभे टूट गए तथा मोह-रूपी वल्ली गिर गई। इससे कामना रूपी छप्पर नीचे गिर गया। उसके मन की सारी बुराईयाँ और अज्ञान नष्ट हो गया और उसका मन साफ हो गया।

🔅 (ख) सामान्य रूप से आंँधी आने के बाद जब बारिश हो जाती है तो धूल आदि विकार शान्त हो जाते है और मन प्रसन्न हो जाता है। उसी प्रकार ज्ञान रूपी आँधी आने के बाद अज्ञान दूर हो जाता है और मन प्रभु भक्ति में रम जाता है। ज्ञान की आँधी के बाद जो भक्ति रूपी जल बरसता है , उस जल से मन भीग उठता है और उसमें सराबोर हो जाता है अर्थात ज्ञान की प्राप्ति के बाद मन शुद्ध हो जाता है।

रचना और अभिव्यक्ति

पृष्ठ संख्या –

93

‌Question: 14 संकलित साखियों और पदों के आधार पर कबीर के‌ धार्मिक और सांपृदायिक सद्भाव संबंधी विचारों पर‌ प्रकाश डालिए।

Answer :

कबीरदास जी के अनुसार ईश्वर सर्वत्र उपस्थित है इसलिए उनको बाहर ढूँढना व्यर्थ है। कबीर जी धार्मिक मत क्रांतिकारी थे। वे बाहरी आडम्बरों का खंडन करते थे तथा अपने हृदय में ही परमात्मा को खोजने पर बल देते थे। ईश्वर मन्दिर , मस्जिद , काबा , कैलाश में नहीं निवास करते। उसे आडम्बरों द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता। ज्ञान के द्वारा उस परब्रह्म ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं। वह परमात्मा तो सभी प्राणियों की हर सांस में बसा है।

भाषा-अध्ययन

पृष्ठ संख्या –

93

Question: 15 निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रुप लिखिए

पखापखी , अनत , जोग , जुगति , बैरागी , निरपख

Answer :

(i) पखापखीपक्ष-विपक्ष
(ii) अनतअन्यत्र
(iii) जोगयोग
(iv) जुगतियुक्ति
(v) बैराग वैराग्य
(vi) निष्पक्षनिरपख

पाठेतर सक्रियता

पृष्ठ संख्या –

94

🔅 कबीर की साखियों को याद कर कक्षा में अंत्याक्षरी का आयोजन कीजिए।

Answer :

छात्र कक्षा में अंत्याक्षरी का आयोजन स्वयं करें।
एन.सी.ई.आर.टी.द्वारा कबीर पर निर्मित फिल्म देखें।
उत्तर :- एन.सी.ई.आर.टी.द्वारा कबीर पर निर्मित फिल्म छात्र स्वयं देखे।

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