काव्य खंड – पाठ : वाख अभ्यास प्रश्न और उत्तर for class 9

NCERT Solutions for Class 9 Hindi (Kshitij) chapter – 10 Vaakh Questions and Answers

लेखक

ललद्यद (1320-1391 ई.)

प्रश्न-अभ्यास

पृष्ठ संख्या

98

Question: 1 ‘रस्सी’ यहां किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और वह कैसी है?

Answer :

रस्सी शब्द यहाँ पर मनुष्य के ‘सांस’ या ‘जीवन’ के लिए प्रयुक्त हुई है और यह रस्सी कच्ची तथा नाशवान है अर्थात् यह कब और कैसे टूट जाए यह बात किसको पता नहीं है। भक्ति रूपी रस्सी के प्रयोग से कवयित्री ईश्वर तक पहुँचना चाहती है लेकिन वह माध्यम अभी इतना कमजोर है की कवयित्री ईश्वर तक पहुंचने से असफल हो रही हैं।

Question: 2 कवयित्री द्वारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ क्यों हो रहे है?

Answer :

कवयित्री इस संसार में उपस्थित लोभ , मोह-माया आदि से मुक्त नहीं हो पा रही है ऐसे में वह अपने ईश्वर की भक्ति सच्चे मन से नहीं कर पा रही है, जैसे कच्चे मिट्टी के सकोरे में रखा जल ज्यादा देर ठहर नहीं पाता , उसी प्रकार कवयित्री के प्रयास अभी कच्चे हैं इसलिए उसके द्वारा मुक्ति के प्रयास भी विफल होते जा रहे हैं।

Question: 3 कवयित्री का ‘घर जाने की चाह’ से क्या तात्पर्य है?

Answer :

कवयित्री का ‘घर जाने की चाह’ से मतलब यह है कि कवयित्री इस भवसागर से मुक्ति पाकर अपने प्रभु की शरण में जाना चाहती है। अर्थात परमात्मा से मिलना चाहती है , वह सांसारिक मायामोह में भटकना नहीं चाहती है और ईश्वर के सारण में रहना चाहती हैं।

Question: 4 भाव स्पष्ट कीजिए :–

(क) जेब टटोली कौड़ी न पाई।

(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं ,
न खाकर बनेगा अहंकारी।

Answer :

(क) कवयित्री कहती है कि इस संसार में आकर वह सांसारिक लोभ , मोह-माया में उलझकर रह गयी और जब अंत समय आया और तब उसने आत्मनिरीक्षण किया तो उसे कुछ भी हासिल न हुआ , अब उसे इस बात की चिंता सता रही है कि भवसागर पार कराने वाले माझी अर्थात् ईश्वर को उतराई के रूप में क्या देगी।

(ख) प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री मनुष्य को प्रभु की प्राप्ति के मार्ग को अपनाने को कहती है। कवयित्री कहती है कि मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से भी दूर रहना चाहिए और भोग विलास में पड़कर मनुष्य को कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है और मनुष्य को मनुष्य जव सांसारिक भोगों को पूरी तरह से त्याग देता है तब उसके मन में अंहकार की भावना पैदा हो जाती है। अतः अहंकार रहित होकर , माया मोह से विरक्त रहते हुए ईश्वर प्राप्ति का प्रयास करना चाहिए।

Question: 5 बंद द्वार की सांकल खोलने के लिए ललद्यद ने क्या उपाय सुझाया है?

Answer :

बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए ललद्यद ने उपाय सुझाया है कि मनुष्य को इस सांसारिक मोह-माया में अधिक लिप्त नहीं रहना चाहिए और न ही इनसे विमुख होना चाहिए। उसे बीच का रास्ता अपनाकर संयमपूर्ण जीवन जीना चाहिए। अज्ञान ही बंद द्वार की सांँकल है , अन्त:एवं बाह्य इन्द्रियों पर नियन्त्रण रखने से मुक्ति मिल सकती है।

Question: 6 ईश्वर प्राप्ति के लिए बहुत से साधक हठयोग जैसी कठिन साधना भी करते हैं , लेकिन उससे भी लक्ष्य प्राप्त नहीं होता। यह भाव किन पंक्तियों में व्यक्त हुआ है?

Answer :

उपर्युक्त भाव निम्न पंक्तियों में व्यक्त हुआ है :–

आई सीधी राह से , गई न सीधी राह।
सुषुम सेतु पर खड़ी थी , बीत गया दिन आह।

जेब टटोली , कौड़ी न पाई।
माझी को दूँ , क्या उतराई?

Question: 7 ‘ज्ञानी’ से कवयित्री का क्या अभिप्राय है?

Answer :

ज्ञानी से कवयित्री का अभिप्राय है जिसने आत्मा और परमात्मा के सम्बन्ध को जान लिया हो। कवयित्री के अनुसार ईश्वर का निवास तो हर एक कण- कण में है परन्तु मनुष्य इसे धर्म में विभाजित कर इधर- उधर ढूंढता हैं कभी मंदिर में तो कभी मस्जिद में खोजता फिरता है। वास्तव में ज्ञानी तो वह है जो अपने अंतकरण में ईश्वर को पा लेता है।

रचना और अभिव्यक्ति

Question: 8 हमारे संतों , भक्तों और महापुरुषों ने बार-बार चेताया है कि मनुष्यों में परस्पर किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता , लेकिन आज भी हमारे समाज में भेदभाव दिखाई देता है –

(क) आपकी दृष्टि में इस कारण देश और समाज को क्या हानि हो रही है?

(ख) आपसी भेदभाव को मिटाने के लिए अपने सुझाव दीजिए।

Answer :

(क) समाज में व्याप्त भेदभाव के कारण निम्नलिखित हानियों हो रही है :–

1. समाज का बँटवारा हो गया है। एक वर्ग से दूसरे वर्ग के बीच अकारण ही मतभेद पैदा हो गया है। हिंदू मुस्लिम का झगड़ा इसी भेदभाव की उपज है जिसके परिणाम स्वरूप भारत और पाकिस्तान दो देश बने।

2. भेदभाव के कारण ही पैदा हुआ समाज में दो वर्ग बने एक उच्च-वर्ग और दुसरा निम्न-वर्ग। उच्च-वर्ग , निम्न-वर्ग को हीन दृष्टि से देखता है।

3. त्योहारों में हिंदू , मुस्लिम के त्योहार में सामिल नहीं होता और मुस्लिम , हिंदू के त्योहार में सामिल नहीं होता।

4. हमारी सहिष्णुता समाप्त होती जा रही है। आक्रोश बढ़ता जा रहा है जिसका परिणाम उग्रवाद , अलगाववाद केरूप में हमारे सामने आ रहा है।

(ख) आपसी भेदभाव को मिटाने के लिए निम्न सुझाव अपनाए जा सकते हैं :–

1. आपस में भेदभाव मिटाने के लिए सर्वप्रथम उन विषयों के ऊपर वार्तालाप ही ना करें , जिससे यह भेदभाव उत्पन्न होता हो।

2. आपसी भेदभाव को मिटाने के लिए सर्वप्रथम राजनैतिक दल अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए लोगों की धार्मिक भावनाओं का सहारा न ले और धार्मिक , जातीय , क्षेत्रीयता , भाषा की राजनीति करने वाली पार्टियों तथा उनके नेताओं को प्रतिबंधित कर देना चाहिए।

3. नौकरियों , शिक्षा और किसी भी अन्य सरकारी योजनाओं में आरक्षण को बढ़ावा न देकर , बल्कि योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने को प्रोत्साहित करना चाहिए।

पाठेतर सक्रियता

पृष्ठ संख्या

99

Question: 9 भक्तिकाल में ललद्यद के अतिरिक्त तामिलनाडु की आंदाल , कर्नाटक की अक्क महादेवी और राजस्थान की मीरा जैसी भक्त कवयित्रियों के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए एवं उस समय की सामाजिक परिस्थितियों के बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।

Answer :

छात्र स्वयं भक्त कवयित्रियों के बारे में जानकारी प्राप्त करें एवं उस समय की सामाजिक परिस्थितियों के बारे में कक्षा में चर्चा करे।

Question: 10 ललद्यद कश्मीरी कवयित्री हैं। कश्मीर पर एक अनुच्छेद लिखिए।

Answer :

कश्मीर शब्द संस्कृत के शब्द कश्यप की भूमि से बना है। ऋषि कश्यप सप्तर्षियों में से एक थे जो एक सारस्वत ब्राह्मण थे और उन्होंने प्राचीन ऐतिहासिक वैदिक धर्म को औपचारिक रूप दिया। उनके वंशज या कश्मीरी पंडित , जिन्हें आमतौर पर उनके सम्मान में घाटी के नाम से जाना जाता है।

मुकुट अथवा कश्मीर को धरती का हेवन यानी स्वर्ग भी कहा जाता हैं। केसर की घाटी कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं। कश्मीर को ऋषि कश्यप की भूमि मानी जाती है जिन्होंने यहाँ लम्बे समय तक तपस्या की थी।

🔆 कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता

कश्मीर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। शानदार बर्फ से ढके पहाड़ , अद्भुत वातावरण और भी बहुत कुछ। इसे स्वर्ग के रूप में भी जाना जाता है। कश्मीर घूमने के लिए सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है , साथ ही एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है। लोग यहां घूमने आते हैं, फिर भी कितनी यादें लेकर यहां से जाते हैं। लोग कश्मीर की सुंदरता को उसके हर पहलू में देखते हैं , चाहे वह अब इससे ढके ऊंचे-ऊंचे पेड़ हों , नदियां हों या मंदिर हों

🔆 पर्यटकों के आकर्षण

कश्मीर भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां देखने के लिए कई मंदिर , नदियाँ और दर्शनीय स्थान हैं। अगर आप जिंदगी में एक बार भी कश्मीर जाएंगे तो आप इसे कभी नहीं भूल पाएंगे। आप अपने पूरे जीवन के लिए सुंदरता की कल्पना कर सकते हैं , और आप हमेशा अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों को इसके बारे में बताएंगे। सिंधु , झेलम और चिनाब ये तीन नदियाँ क्षेत्र को सदियों से हरा भरा बना रही हैं। गुलमर्ग की सुंदर और सुगंधित पुष्पों ढकी हुई भूमि , सुगंधित देवदार के वृक्ष , बर्फ से ढके पर्वत तथा लंबोदरी का निर्मल और स्वच्छ शीतल जल यहाँ के आकर्षण के मुख्य स्रोत हैं। श्रीनगर में स्थित डल झील भी देशी विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

Extra important question

Question: वाख क्या है?

Answer :

ललद्यद की काव्य-शैली को वाख कहा जाता है। जिस तरह से हिंदी में कबीर के दोहे और मीरा के पद।

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