Hindi (kshitij) Summary
पाठ: 1 दो बैलों की कथा (सारांश) for Class 9

NCERT Solutions for class 9 Hindi (Kshitij) Chapter: 1 Do Bailon ki Katha summary

Class 9 दो बैलों की कथा : सारांश

पाठ परिचय

लेखक

– प्रेमचंद

पाठ दो बैलों की कथाके लेखक ‘प्रेमचंद जी हैं। यह अध्याय प्रेमचंद जी ने आज़ादी पर लिखा है। इस अध्याय में प्रेमचंद जी ने यह बताया है कि , आज़ादी सभी को चाहिए होती है ! फिर चाहे वह कोई इंसान हो या कोई पशु। सभी को अपनी-अपनी आज़ादी बहुत प्यारी होती है। कोई भी किसी भी बंधन में बंधकर नहीं रह सकता। सभी को अपनी-अपनी आज़ादी प्राप्त करने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता हैं। इस प्रकार यह अध्याय आज़ादी के आंदोलन की भावना से जुड़ा है।

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अध्याय के शुरुआत में प्रेमचंद जी ने गधे के सीधेपन और सरलता के व्यवहार के बारे में बताया हैं, कि किस प्रकार लोग गधे के सीधेपन को बेवकूफी समझ लेते हैं और अगर किसी को पागल या मूर्ख कहना होता है तो उसे गधा कहकर पुकारते हैं। बल्कि वास्तव में गधे का स्वभाव शांत साधुओं और मुनियों की तरह होता है। इसकी तुलना लेखक ने भारतीय लोगों से की है , जिस प्रकार अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया था और भारतीय लोगों पर अंग्रेजों द्वारा हो रहे अन्याय के बावजूद भारतीय चुप रहे लेकिन जब वही भारतीय लोग विरोध करते थे तो उच्च श्रेणी के कहलाने लगते थे। लेखक के अनुसार ‘गधे का छोटा भाई बैल है , जो सीधा तो है , परंतु कभी-कभी अड़ियल बन जाता है’।

अब कहानी इस प्रकार शुरू होती है।

झूरी नाम का किसान जिसके पास दो बलवान बैल थे ,‘हीरा और मोती’। दोनों बैलों में पक्की दोस्ती थी। और इसी वजह से वे दोनों बैल सारे काम मिल-जुल कर करते थे। और दोनों बैल एक दूसरे पर पूरा विश्वास रखते थे। वे दोनों बैल बिना किसी आवाज़ के ही इशारों से एक दूसरे की बातें समझ जाते थे जिसे मुख भाषा में बात करना कहते हैं। एक बार झूरी का साला जिसका नाम ‘गया’ था। वह दोनों बैलों को अपने घर ले गया। जब झूरी का साला बैलों को अपने घर ले जा रहा था तब दोनों बैलों को लगा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है इसी वजह से दोनों बैलों ने मिलकर गया को पूरे रास्ते बहुत परेशान किया और पूरे रास्ते दोनों बैल झूरी के लिए मन ही मन सोच रहे थे। जब वे शाम के समय अनजानी जगह पर पहुंचे तब उन्हें सब कुछ बेगाना सा लग रहा था , क्योंकि वे उन दोनों बैलों की जगह नहीं थी इसी वजह से जब दोनों बैलों को भूख लगी तब भी उन्होंने खाना नहीं खाया। फिर जब उन दोनों बैलों से रात के समय रहा नहीं गया तो फिर दोनों बैलो ने अपने गले में बंधी रस्सी तोड़ी और झूरी के घर वापस लौट गए। झूरी ने जब अपने दोनों बैलों को घर वापस देखा तो वह बहुत खुश हुआ लेकिन वहीं पर झूरी की पत्नी दोनों बैलों को नमक-हराम कहती है। झूरी अपनी पत्नी से कहता है , कि दोनों बैल इस तरह किसी भी बिना वजह के नहीं आ सकते। जरूर उनको किसी ने चारा-भूसा नहीं दिया होगा। इस बात से झूरी की पत्नी को गुस्सा आया और उसने फिर दोनों बैलों की देख-रेख करने वाले से कहा , ‘कि इन दोनों को केवल सूखा चारा ही खाने में दिया जाए’ और उन्होंने ऐसा ही किया , क्योंकि देख-रेख करने वाला झूरी की बात अनसुनी कर देता था।

उसके दूसरे ही दिन झूरी का साला दोनों बैलों को वापस अपने घर ले आया। गया ने दोनों बैलों को मोटी रस्सी से बाँधकर सूखा चारा डाल दिया। उन दोनों बैलों ने नाँद (बैलों की खाना खाने की जगह) की तरफ देखा तक नहीं। अगले दिन गया ने दोनों बैलों को अपने खेत में जोतने के लिए हल से बांधा , लेकिन दोनों बैलों में इतनी गुस्सा थी , कि उन्होंने अपना एक भी पैर नहीं उठाया क्योंकि उन बैलों का ऐसा अपमान कभी-भी नहीं हुआ था। बैलों के खेत ना जोतने पर गया ने हीरा की नाक पर डंडे मारे तो मोती बहुत ज्यादा भड़क गया और मोती ने हल समेत ही भागना शुरू कर दिया। इस वजह से हल , जुआ ,जोत सब टूट गए। हीरा मोती से इशारों में कहता है कि भागने का कोई फायदा नहीं हैं क्योंकि अगर भागे तो इस बार बहुत पिटाई होगी। मोती कहता है कि उसे मजा चखाना चाहिए। तब हीरा उसे बताता है कि यह हमारी जाति के धर्म के विरुद्ध होगा। थोड़ी देर बाद गया उन दोनों बैलों के गुस्सेपन को समझ गया और उन्हें पकड़कर वापस घर ले गया और फिर से उनके सामने वही सूखा-भूसा डाल दिया। थोड़ी देर बाद एक छोटी लड़की दोनों बैलों के मुंह में एक-एक रोटी खिला जाती है। दोनों बैलों को ऐसा अनुभव होता है कि यहाँ भी हमारी देख-भाल करने वाला कोई तो है जो हमें प्यार से खाना खिलाए। वह छोटी लड़की भैरों की बेटी थी। उसकी सौतेली मां उसे हमेशा मारती रहती थी। जब हीरा और मोती पूरे दिन भर काम करते थे और फिर वही सूखा-भूसा खाने के बाद उस छोटी लड़की के हाथ से दो रोटियां खाकर दोनों बैल भी खुश रहा करते थे। लेकिन कहीं ना कहीं दोनों बैल विद्रोह की भावना से जूझ रहे थे। जब कभी मोती को बहुत गुस्सा आता और किसी को मारने का मन करता तब हीरा उसे समझा-बुझाकर शांत कर देता था। फिर जब एक दिन मोती ने वहाँ से भाग जाने की बात की तो हीरा मोती की बात मान गया। फिर एक दिन वह हर रोज की तरह हीरा और मोती को खाना खिलाने के लिए आई और फिर उसने उनकी रस्सी खोल दी। वह लड़की शोर करती हुई दौड़ती है , कि बैल भागे जा रहे हैं। देखते ही देखते बैल वहां से सच में गायब हो गए। हीरा और मोती भागने के चक्कर में अपने गाँव का रास्ता ही भूल गए और फिर किसी और अनजान गाँव में पहुंचकर वे दोनों हैरानी में पड़ गए। तब हीरा और मोती एक खेत के किनारे खड़े होकर यह सोचने लगे कि अब हम दोनों को क्या करना चाहिए। हीरा और मोती दोनों को ही बहुत भूख लगी थी , इसी वजह से वे दोनों पास के एक मटर के खेत में मटर चरने लगे। फिर जब उन दोनों का पेट भर गया तो वे दोनों मस्ती में खेलने लगे।

लेखक ने बताया कि जब दोनों बैल मज़े से मस्ती कर रहे थे तभी उन्हें एक साँड उनकी और आता हुआ दिखाई दिया। दोनों बैलों को लगा कि अब भागने का कोई रास्ता नहीं है और अगर वे दोनों यहां से भाग जाएंगे तो कायर कहलाएंगे। दोनो बैलों ने मिलकर एक योजना बनाई कि हम दोनों मिलकर इस साँड को घेर कर मारते हैं और ऐसा ही हुआ हीरा ने आगे से वार किया और मोती ने पीछे से टक्कर मारी , हीरा और मोती ने मिलकर उस सांड को बहुत मारा इस तरह वो साँड बहुत जख्मी हो गया और वहांँ से भाग गया। भागते-भागते उस सांड का संतुलन बिगड़ गया और वह फिर से जमीन पर धम से गिर गया। मोती साँड को मारने के लिए दुबारा आगे बढ़ता है , लेकिन हीरा मोती से कहता है कि गिरे हुए दुश्मन पर कभी भी वार नहीं करना चाहिए। दोनों बैलों को फिर याद आता है कि हमें घर भी जाना है। मोती हीरा से कहता है कि कुछ खाकर सोचते हैं और फिर वह फिर से मटर के खेत में घुस जाते हैं। हीरा ने मोती से मना भी किया लेकिन तभी भी मोती नहीं माना। हीरा और मोती को देखकर दो आदमी लाठी लेकर उन्हें घेरने लगे खेत में पानी होने के कारण मोती के खुर ( बैल के पैर) कीचड़ में धँसने लगे। मोती वहाँ से भाग नहीं पाया। जब हीरा ने यह देखा तो वह भी वहीं पर आ गया और फिर उन दोनों आदमियों ने हीरा और मोती दोनों को मवेशीखाने में बंद कर दिया।

आगे लेखक ने हीरा और मोती दोनों की बहुत बुरी दशा के बारे में बताते हुए कहा है कि हीरा और मोती को पूरे दिन मवेशीखाने में भूखा रखा गया और उस मवेशीखाने में पहले से ही कई जानवर थे जैसे- गधे , घोड़े , भैंसे व बकरियां सब लाशों की तरह लेटे हुए थे। फिर धीरे-धीरे रात होती गई और उनकी भूख भी बढ़ती गई। हीरा गुस्से में मोती से कहता है कि चलो यहां से भाग जाए फिर वह दोनों भागने के उपाय ढूंढने लगे। वह दोनों बाड़े की कच्ची दीवार तोड़ने की योजना बनाते हैं। हीरा अपने मजबूत सिंगो से कच्ची दीवार पर वार करके दीवार को तोड़ने का प्रयास करता है। दीवार नहीं टूटती है लेकिन ऐसा करने की वजह से मवेशीखाने के चौकीदार को पता चल जाता है और फिर चौकीदार हीरा को डंडे से मारता है। फिर हीरा को मोटी रस्सी से बांध दिया जाता है। अब मोती कच्ची दीवार पर टक्कर मारने लगता है और वह धीरे-धीरे करके आधी दीवार गिरा देता है। उस टूटी हुई दीवार के रास्ते घोड़ियाँ , बकरियाँ , भैंसे वहां से भाग गई लेकिन गधा अभी भी वहीं खड़ा रह गया। हीरा ने गधे से पूछा कि ‘तुम यहां क्यों खड़े हो’? तो गधे ने जवाब दिया कि अगर हमें किसी ने पकड़ लिया तो हम वापस यहीं पर आ जाएंगे और यही पड़े रहेंगे। मोती ने अपने दोस्त हीरा की रस्सी को तोड़ने की कोशिश की लेकिन मोती असफल रहा। हीरा ने मोती से कहा कि कम से कम तुम तो यहाँ से चले जाओ , लेकिन मोती हीरा के बिना वहां से जाना ही नहीं चाहता था। अब हीरा ने मोती से कहा कि तुम यहां से चले जाओ वरना तुम्हें भी मार पड़ेगी। मोती हीरा से कहता है कि , उसने लगभग नौ दस जानवरों की जान बचाई है वह सारे उसे आशीर्वाद देंगे। तभी मोती ढीठ और मूर्ख गधे को सींग मार-मार कर वहाँ से भगा देता है। और खुद हीरा के पास आकर सो जाता है। सुबह जब सबने मवेशीखाने की हालत देखी तो , वहाँ पर हंगामा मच गया। चौकीदार ने मोती को फिर से जमकर पीटा और मोटी रस्सी से बांध दिया।

हीरा और मोती दोनों बैलों को सात दिनों तक भूखा रखा गया। पूरे दिन में सिर्फ एक बार ही पानी दिया जाता था , इस वजह से दोनो बैल बहुत ज्यादा कमजोर हो गए। आखिरकार उन्हें बेच ही दिया गया। हीरा और मोती का खरीदार एक भयानक सूरत और दढ़ियल व्यक्ति था। उस डरावने खरीदार व्यक्ति को देखकर हीरा और मोती बहुत ज्यादा डर गए और ईश्वर को याद करने लगे। क्योंकि हीरा और मोती दोनों को ईश्वर पर भरोसा था। बेशक दोनों बैलों कि उस दढ़ियल खरीदार के डर से कुछ करने की हिम्मत नहीं थी , लेकिन फिर भी वह दोनों वहाँ से भाग गए। दोनों को भागते-भागते एहसास हुआ कि जैसे वे पहले भी यहां से गुजर चुके हैं फिर उन दोनों की जाने-पहचाने रास्ते को देखकर थकान भी मिट गई। और वे पहले से ज्यादा तेजी से दौड़ने लगे। दोनों बैल अपने गांव पहुंच कर भागे-भागे अपने बँधने के जगह पर खड़े हो गए। अपने प्रिय बैलों को देखकर झूरी की आँखों से आँसू निकल आए। बैलों के पीछे उनका दढ़ियाल खरीदार आकर हीरा और मोती दोनों की रस्सी पकड़ लेता है। झूरी ने दोनों बैलों को ले जाने का विद्रोह किया। जब दढ़ियाल खरीददार ने दोनों बैलों को जबरदस्ती ले जाने की कोशिश की तो मोती ने दढ़ियाल खरीदार को सींग मार दी। और उसका पीछा करने लगा दढ़ियाल खरीददार मोती के डर से गांव के बाहर भागने लगा और गालियां देना शुरू कर देता है। साथ ही वह पत्थर भी फेंकता है।

दढ़ियाल खरीदार के इस रवैये पर गांव के सभी लोग उस पर हंसते हैं। इसी तरह दढ़ियाल गालियां देता हुआ चला गया। हीरा और मोती की फिर से मूक भाषा (इशारों) में बातें शुरू हो जाती हैं और कुछ देर बाद ही हीरा और मोती दोनों के लिए अच्छे खाने का प्रबंध किया जाता है। झूरी अपने बैल हीरा और मोती को प्यार करने लगता है। उसके साथ ही उसकी पत्नी भी हीरा और मोती दोनों को प्यार से चूमती है।

शब्दार्थ :

1. बुद्धिहीन- मूर्ख।
2. परले दर्जे का- पहले नंबर का।
3. सहिष्णुता- जो सभी धर्मों पर विश्वास करें।
4. कुलेल- मिट्टी में खेलना।
5. कदाचित- एकदम।
6. कुसमय- गलत समय।
7. ईट का जवाब पत्थर से देना- सामने जवाब देना।
8. अड़ियल- किसी बात पर अटक जाना ,जिद्दी।
9. पछाई- पश्चिम के पश्चिमी उत्तर प्रदेश।
10. चौकस- जागरूक।
11. डील- रूप ,कप।
12. मूक- मौन।
13. वंचित है- रहती है।
14. विग्रह- लड़ाई।
15. विनोद- हंसी।
16. आत्मीयता- अपनापन।
17. गोई- बैलों की जोड़ी।
18. पगहिमा- पशुओं को बांधने का रास्सा।
19. चाकरी- सेवा।
20. जालिम- क्रूर।
21. बेगाना- पराया।
22. कनखियों से- टेढ़ी नजरों से।
23. चरनी- चारा खिलाने का स्थान।
24. गदगद् होना- प्रसन्न होना।
25. प्रेमालिंगन- प्यार भरा आलिंगन।
26. अभूतपूर्व- जो पहले ना हुई हो।
27. प्रतिवाद- विरोध में तर्क।
28. नमकहराम- कृतघ्न।
29. ताकीद- आदेश।
30. मसलहत- बरकत।
31. सहसा- अचानक।
32. बेतहाशा- अनियंत्रित।
33. डौंकना- सांड का रंभाना।
34. तजुर्बा- अनुभव।
35. झल्लाना- क्रोधित होना।
36. कांजीहौस- रपट।
37. उजड्डपन- साहस।
38. प्रतिद्वंदी- दुश्मन।
39. ज्यों-के-त्यों- अपरिवर्तित।
40. प्राणी- जीव , जानवर।
41. भोर- सुबह।
42. तृण- तिनका।
43. ठठरियाँ- हड्डियां।
44. अंतर्ज्ञान- मन में समझ लेना।
45. टटोलना- परखना।
46. नगीच- समीप।
47. उन्मत्त- मस्त।
48. अख्तियार- अधिकार।
49. खुर- पशुओं के पैर
50. नाँद- पशुओं की खाने की जगह

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