अपने मित्र को एक पत्र लिखिए जिसमें उसने आपको उधार दी गई पुस्तक खो जाने के लिए क्षमा याचना करते हुए लिखा है।

Apne Mitra ko ek Patra likhiye jisme usne aapko udhar de gai pustak kho jane ke liye kshma yachna karte hue likha hai.

102 डिफ़ेंस कॉलोनी
नई दिल्ली

अक्टूबर 31, 20__

मेरे प्रिय राहुल,


आशा करता हूं कि तुम ठीक होंगे और तुम्हारी पढ़ाई भी अच्छी चल रही होगी। मेरी पढ़ाई भी बहुत अच्छी चल रही है। इसका सारा श्रेय तुम्हें जाता है क्योंकि तुमने मुझे अपनी पुस्तक दी थी। वो पुस्तक मेरे बहुत काम आई जो कि तुमने दो सप्ताह पहले मुझे दी थीं, उन्हें सही तरह से ना रख पाने का मुझे गहरा खेद है और उन्हें वापस ना लौटा पाने का और तुम्हें दुख पहुंचाने के लिए, मैं तुमसे और भगवान से माफी मांगता हूं।

मुझे पता है कि वह पुस्तक तुम्हारे लिए बहुत मूल्यवान थी और मुझे मेरी गलती का एहसास है। तुमने मुझपर बहुत भरोसा करके इसे मुझे पढ़ने और सुरक्षित रूप से वापस करने के लिए दी थी। मैं उस पुस्तक को तुम्हें अपनी आज तक की बची पॉकेटमनी से खरीद कर वापस दूंगा और मुझे तुम्हें तुम्हारी पुस्तक लौटाने में बहुत दिलचस्पी है।

मैं अपनी माफी के साथ हार गया, क्योंकि मैंने अपने इतने प्यारे मित्र का भरोसा तोड़ा है। मुझे विश्वास है की तुम मुझे माफ कर दोगे। कृपया भविष्य में इस दोष को कभी नहीं दोहराने का मेरा वादा स्वीकार करें। और मुझे अपने विचार पत्र के जरिए जरूर भेजना, मैं तुम्हारे पत्र का इंतजार करूंगा।

मैं आशा करता हूं कि तुमने मुझे माफ किया।

तुम्हारा प्रिय मित्र

आरव

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