दोपहर का भोजन प्रश्न और उत्तर Class 11

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Antra Chapter 2 Dopahar ka bhojan Questions and Answers

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Antra Chapter 2 - दोपहर का भोजन provides comprehensive answers to all the questions from the textbook. This chapter explores the themes of family, poverty, and resilience through the story of Siddheshwari and her sons. Below are detailed solutions to help students prepare for their exams effectively.

Key Questions and Answers

Question 1: Why did Siddheshwari lie to Ramchandra about Mohan?
Siddheshwari lied to Ramchandra about Mohan to foster empathy and care between the brothers. She believed that Ramchandra’s support would help Mohan overcome his challenges, strengthening their familial bond.

Question 2: Describe the resilience of the most vibrant character in the story.
Mohan exemplifies resilience by continuing his studies despite financial hardships. His determination to seek help and self-study highlights his unwavering commitment to his goals.

Question 3: Mention the instances in the story that reflect the struggles of poverty.
The story depicts poverty through Siddheshwari’s financial worries and Mohan’s lack of study materials, showcasing the daily struggles of a economically disadvantaged family.

Summary of Chapter 2
This chapter delves into the emotional and financial struggles of a family, emphasizing the importance of unity and perseverance. The characters’ interactions reveal deep-seated issues of poverty and the lengths a mother goes to protect her children.

Exam Preparation Tips
- Focus on character analysis and thematic questions.
- Practice writing answers with textual references.
- Review summaries and key points for quick revision.

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Antra Chapter 2 – दोपहर का भोजन

प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1. सिद्धेश्वरी ने अपने बड़े बेटे रामचंद्र से मँझले बेटे मोहन के बारे में झूठ क्यों बोला?

उत्तर: सिद्धेश्वरी ने अपने बड़े बेटे रामचंद्र से मँझले बेटे मोहन के बारे में झूठ इसलिए बोला क्योंकि वह चाहती थी कि रामचंद्र मोहन के प्रति अधिक सहानुभूति और देखभाल दिखाए। सिद्धेश्वरी का मानना था कि मोहन को अपने बड़े भाई का समर्थन और प्यार चाहिए, और इसलिए उसने रामचंद्र को मोहन की स्थिति को लेकर कुछ गलत जानकारी दी।

इस झूठ का उद्देश्य परिवार में एकता और सहयोग को बढ़ावा देना था, ताकि दोनों भाई एक-दूसरे के करीब आ सकें और एक मजबूत पारिवारिक बंधन बना सकें। सिद्धेश्वरी का यह कदम यह दर्शाता है कि कभी-कभी माता-पिता अपने बच्चों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए ऐसे निर्णय लेते हैं, जो सही नहीं होते, लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा बच्चों के भले के लिए होता है।

इस प्रकार, सिद्धेश्वरी का झूठ एक सकारात्मक उद्देश्य के लिए था, जिससे वह अपने परिवार में प्रेम और एकता को बनाए रखना चाहती थी।

प्रश्न 2. कहानी के सबसे जीवंत पात्र के चरित्र की दृढ़ता का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।

उत्तर: कहानी में सबसे जीवंत पात्र मोहन है, जो अपनी कठिनाइयों के बावजूद दृढ़ता का परिचय देता है। मोहन का चरित्र इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर सकता है।

दृढ़ता का उदाहरण: मोहन ने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया, जैसे कि आर्थिक समस्याएँ और पारिवारिक दबाव। इसके बावजूद, उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत की। एक विशेष घटना में, जब उसके पास परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक सामग्री नहीं थी, तो उसने अपने दोस्तों से मदद मांगी और खुद से अध्ययन करने का निर्णय लिया।

इस दृढ़ता ने उसे न केवल अपनी पढ़ाई में सफलता दिलाई, बल्कि उसके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया। मोहन का यह संघर्ष और उसकी मेहनत यह दर्शाती है कि कठिनाइयों के बावजूद, यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित है, तो वह किसी भी बाधा को पार कर सकता है।

इस प्रकार, मोहन का चरित्र न केवल कहानी को जीवंत बनाता है, बल्कि यह हमें यह भी सिखाता है कि दृढ़ता और मेहनत से हम अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।

प्रश्न 3. कहानी के उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे गरीबी की विवशता झाँक रही हो।

उत्तर: कहानी में गरीबी की विवशता को कई प्रसंगों के माध्यम से दर्शाया गया है। निम्नलिखित बिंदुओं में उन प्रसंगों का उल्लेख किया गया है:

  1. आर्थिक कठिनाइयाँ:
    • कहानी में मोहन के परिवार की आर्थिक स्थिति का वर्णन किया गया है, जहाँ उनके पास आवश्यक वस्तुओं की कमी है। उदाहरण के लिए, मोहन की माँ सिद्धेश्वरी अक्सर यह चिंता करती है कि घर का खर्च कैसे चलेगा और बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे कैसे जुटाएंगे।
  2. पढ़ाई में बाधाएँ:
    • मोहन की पढ़ाई में रुकावटें आती हैं क्योंकि उसके पास किताबें और अन्य अध्ययन सामग्री नहीं होती। वह अपने दोस्तों से किताबें मांगता है, जो यह दर्शाता है कि गरीबी के कारण उसे अपनी शिक्षा को जारी रखने में कठिनाई हो रही है।
  3. भोजन की कमी:
    • कहानी में एक प्रसंग है जब मोहन और उसके परिवार को भोजन के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कई बार उन्हें एक समय का खाना भी मुश्किल से मिलता है, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति प्रभावित होती है।
  4. सामाजिक भेदभाव:
    • मोहन के परिवार की गरीबी के कारण उन्हें समाज में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। अन्य लोग उन्हें नीची दृष्टि से देखते हैं, जिससे मोहन के आत्म-सम्मान पर असर पड़ता है।
  5. परिवार का तनाव:
    • आर्थिक समस्याओं के कारण परिवार में तनाव बढ़ता है। सिद्धेश्वरी और उसके पति के बीच अक्सर झगड़े होते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि गरीबी केवल भौतिक कठिनाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है।

इन प्रसंगों के माध्यम से कहानी में गरीबी की विवशता को गहराई से चित्रित किया गया है, जो पाठकों को इस सामाजिक समस्या के प्रति जागरूक करता है।

प्रश्न 4. ‘सिद्धेश्वरी का एक से दूसरे सदस्य के विषय में झूठ बोलना परिवार को जोड़ने का अनथक प्रयास था’ इस संबंध में आप अपने विचार लिखिए।

उत्तर: सिद्धेश्वरी का अपने परिवार के सदस्यों के बारे में झूठ बोलना वास्तव में एक जटिल और संवेदनशील विषय है। यह उसके परिवार को जोड़ने के लिए एक अनथक प्रयास का प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि कभी-कभी माता-पिता अपने बच्चों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए ऐसे निर्णय लेते हैं जो नैतिक रूप से सही नहीं होते।

विचार:

  1. संबंधों की मजबूती:
    • सिद्धेश्वरी का झूठ बोलना इस बात का संकेत है कि वह अपने बच्चों के बीच एक मजबूत बंधन बनाना चाहती थी। वह जानती थी कि यदि रामचंद्र को मोहन की स्थिति के बारे में सही जानकारी मिलेगी, तो वह शायद मोहन के प्रति सहानुभूति नहीं दिखाएगा। इसलिए, उसने झूठ बोलकर रामचंद्र को मोहन के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास किया।
  2. परिवार में सामंजस्य:
    • सिद्धेश्वरी का यह कदम परिवार में सामंजस्य बनाए रखने के लिए था। परिवार में तनाव और संघर्ष को कम करने के लिए कभी-कभी ऐसे निर्णय लिए जाते हैं, जो तात्कालिक रूप से सही नहीं लगते, लेकिन दीर्घकालिक में परिवार की एकता को बनाए रखने में सहायक होते हैं।
  3. भावनात्मक सुरक्षा:
    • सिद्धेश्वरी का उद्देश्य अपने बच्चों को भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करना था। वह चाहती थी कि दोनों भाई एक-दूसरे का समर्थन करें और एक-दूसरे के प्रति प्यार और देखभाल का भाव रखें। इस प्रकार, उसने अपने झूठ के माध्यम से परिवार में एक सकारात्मक वातावरण बनाने का प्रयास किया।
  4. नैतिकता और उद्देश्य:
    • हालांकि झूठ बोलना नैतिक रूप से गलत है, सिद्धेश्वरी का उद्देश्य सकारात्मक था। यह दर्शाता है कि कभी-कभी माता-पिता अपने बच्चों के भले के लिए ऐसे निर्णय लेते हैं, जो सही नहीं होते, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य हमेशा परिवार की भलाई होता है।

निष्कर्ष:

सिद्धेश्वरी का झूठ बोलना एक जटिल स्थिति को दर्शाता है, जहाँ माता-पिता अपने बच्चों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए अनैतिक तरीके अपनाते हैं। यह एक अनथक प्रयास है जो परिवार की एकता और सामंजस्य को बनाए रखने के लिए किया जाता है। हालांकि यह सही नहीं है, लेकिन इसका उद्देश्य परिवार के सदस्यों के बीच प्यार और सहयोग को बढ़ावा देना होता है। इस प्रकार, यह हमें यह सिखाता है कि कभी-कभी परिवार में सामंजस्य बनाए रखने के लिए कठिन निर्णय लेने पड़ सकते हैं।

प्रश्न 5. ‘अमरकांत आम बोलचाल की ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं जिससे कहानी की संवेदना पूरी तरह उभरकर आ जाती है।’ कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: अमरकांत की लेखनी में आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग उनकी कहानियों को जीवंत और संवेदनशील बनाता है। उनकी भाषा सरल, सहज और प्रभावी होती है, जो पाठकों को कहानी के पात्रों और उनके अनुभवों से जोड़ती है। निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से इस बात को स्पष्ट किया जा सकता है:

1. सादगी और सहजता:

  • अमरकांत की भाषा में कोई कृत्रिमता नहीं होती। वे सीधे और स्पष्ट शब्दों का उपयोग करते हैं, जिससे पाठक आसानी से पात्रों की भावनाओं और परिस्थितियों को समझ पाते हैं। उदाहरण के लिए, जब वे पात्रों के संघर्षों का वर्णन करते हैं, तो उनकी भाषा में एक सहजता होती है, जो पाठकों को उस स्थिति में ले जाती है।

2. संवेदनशीलता का संचार:

  • उनकी कहानियों में पात्रों की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया जाता है। जब सिद्धेश्वरी अपने बच्चों के लिए चिंतित होती हैं या मोहन अपनी कठिनाइयों का सामना करता है, तो उनकी भावनाएँ पाठकों के दिलों में गहराई से उतर जाती हैं। यह संवेदनशीलता भाषा की सरलता के माध्यम से और भी प्रभावी हो जाती है।

3. पात्रों की पहचान:

  • अमरकांत के पात्र आम जीवन के लोग होते हैं, और उनकी भाषा भी उसी के अनुरूप होती है। यह पात्रों को अधिक वास्तविक और पहचानने योग्य बनाता है। जब पाठक इन पात्रों की भाषा सुनते हैं, तो वे उनके साथ जुड़ाव महसूस करते हैं, जिससे कहानी की संवेदना और भी गहरी हो जाती है।

4. सामाजिक संदर्भ:

  • उनकी भाषा में सामाजिक संदर्भों का समावेश होता है, जो कहानी की पृष्ठभूमि को स्पष्ट करता है। उदाहरण के लिए, जब वे गरीबी, संघर्ष और सामाजिक भेदभाव का वर्णन करते हैं, तो उनकी भाषा में उन मुद्दों की गहराई और गंभीरता दिखाई देती है। यह पाठकों को सोचने पर मजबूर करता है और कहानी के संदेश को मजबूती से प्रस्तुत करता है।

5. संवादों की प्रभावशीलता:

  • अमरकांत के संवाद सीधे और प्रभावी होते हैं। पात्रों के बीच की बातचीत में आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग होता है, जो कहानी को और अधिक जीवंत बनाता है। यह संवाद न केवल पात्रों की भावनाओं को व्यक्त करते हैं, बल्कि कहानी की संवेदना को भी उजागर करते हैं।

निष्कर्ष:

अमरकांत की लेखनी में आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग कहानी की संवेदना को पूरी तरह उभारने में सहायक होता है। उनकी सरल और सहज भाषा पाठकों को पात्रों के अनुभवों से जोड़ती है, जिससे कहानी की गहराई और प्रभावशीलता बढ़ जाती है। इस प्रकार, उनकी भाषा न केवल कहानी को जीवंत बनाती है, बल्कि पाठकों के दिलों में गहरी छाप भी छोड़ती है।

प्रश्न 6. रामचंद्र, मोहन और मुंशी जी खाते समय रोटी न लेने के लिए बहाने करते हैं, उसमें कैसी विवशता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: रामचंद्र, मोहन और मुंशी जी के रोटी न लेने के बहाने उनकी आर्थिक स्थिति और परिवार की विवशता को दर्शाते हैं। कहानी में, जब सिद्धेश्वरी अपने परिवार के सदस्यों को रोटी लेने के लिए कहती है, तो वे सभी यह जानते हैं कि घर में सीमित मात्रा में भोजन है।

  1. रामचंद्र: जब सिद्धेश्वरी उसे और रोटी देने का आग्रह करती है, तो वह कहता है कि उसका पेट भर गया है। यह एक बहाना है, क्योंकि वह जानता है कि अगर वह और रोटी लेगा, तो अन्य सदस्यों को कम खाना मिलेगा।
  2. मोहन: मोहन भी रोटी लेने से मना कर देता है, यह कहते हुए कि वह दाल पीकर ही संतुष्ट है। यह भी एक बहाना है, क्योंकि वह जानता है कि घर में रोटी की कमी है और वह नहीं चाहता कि उसकी माँ को और अधिक चिंता हो।
  3. मुंशी जी: जब सिद्धेश्वरी उन्हें रोटी देने का आग्रह करती है, तो वे भी मना कर देते हैं, यह कहते हुए कि उन्हें और रोटी की आवश्यकता नहीं है। उनका यह उत्तर भी उनकी आर्थिक स्थिति को दर्शाता है, क्योंकि वे जानते हैं कि घर में सभी के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है।

इस प्रकार, तीनों पात्रों के बहाने केवल उनकी भूख को नहीं, बल्कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और एक-दूसरे के प्रति उनकी जिम्मेदारी को भी दर्शाते हैं। वे सभी एक अदृश्य समझौते में बंधे हुए हैं कि कोई भी सदस्य अधिक रोटी नहीं लेगा, ताकि सभी को कुछ न कुछ मिल सके।

निष्कर्ष:

इस कहानी में, सिद्धेश्वरी की कोशिश होती है कि परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे के प्रति स्नेह और सम्मान बनाए रखें, भले ही उन्हें खुद भूखा रहना पड़े। यह स्थिति न केवल उनकी गरीबी को दर्शाती है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच के संबंधों की मजबूती को भी उजागर करती है।

प्रश्न 7. सिद्धेश्वरी की जगह आप होते तो क्या करते?

उत्तर: सिद्धेश्वरी की जगह आप होते तो क्या करते?

यदि मैं सिद्धेश्वरी की जगह होता, तो मैं निम्नलिखित कदम उठाने की कोशिश करता:

  1. परिवार के सदस्यों के साथ खुलकर बात करना: मैं अपने परिवार के सदस्यों से अपनी भावनाएँ और चिंताएँ साझा करता। यह महत्वपूर्ण है कि हम एक-दूसरे के साथ अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करें ताकि हम एक-दूसरे का समर्थन कर सकें।
  2. आर्थिक स्थिति का समाधान खोजना: मैं परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए उपाय खोजता। जैसे कि छोटे व्यवसाय की शुरुआत करना या किसी कौशल को सीखकर काम पर लगना। यह न केवल आर्थिक मदद करेगा, बल्कि परिवार के सदस्यों को भी एक नई दिशा देगा।
  3. सकारात्मकता बनाए रखना: मैं परिवार में सकारात्मकता बनाए रखने का प्रयास करता। चाहे कितनी भी कठिनाई हो, एक-दूसरे को प्रोत्साहित करना और एकजुट रहना महत्वपूर्ण है।
  4. सामाजिक सहायता: मैं स्थानीय संगठनों या सरकारी योजनाओं से सहायता प्राप्त करने की कोशिश करता। कई बार, समाज में ऐसे संगठन होते हैं जो आर्थिक सहायता या खाद्य सामग्री प्रदान करते हैं।
  5. स्वास्थ्य का ध्यान रखना: मैं यह सुनिश्चित करता कि परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ रहें। उचित पोषण और स्वास्थ्य देखभाल आवश्यक है, खासकर बच्चों के लिए।
  6. भावनात्मक समर्थन: मैं परिवार के सदस्यों को भावनात्मक समर्थन देने की कोशिश करता। यह महत्वपूर्ण है कि हम एक-दूसरे के साथ रहें और कठिन समय में एक-दूसरे का सहारा बनें।

इन कदमों के माध्यम से, मैं न केवल अपने परिवार की स्थिति को सुधारने की कोशिश करता, बल्कि उन्हें एकजुट रखने और सकारात्मकता बनाए रखने का भी प्रयास करता।

प्रश्न 8. रसोई संभालना बहुत जिम्मेदारी का काम है सिद्ध कीजिए।

उत्तर: रसोई संभालना: जिम्मेदारी का काम

रसोई संभालना वास्तव में एक बहुत जिम्मेदारी का काम है। यह न केवल भोजन तैयार करने की प्रक्रिया है, बल्कि इसमें परिवार के सदस्यों की सेहत, पोषण और संतोष का भी ध्यान रखना शामिल है। यहाँ कुछ बिंदु दिए गए हैं जो इस बात को सिद्ध करते हैं:

  1. स्वास्थ्य और पोषण: रसोई में खाना बनाते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी आवश्यक पोषक तत्व शामिल हों। एक अच्छी गृहिणी या रसोइया यह जानता है कि किस प्रकार के खाद्य पदार्थों का संयोजन करना चाहिए ताकि परिवार के सभी सदस्यों को संतुलित आहार मिल सके।
  2. समय प्रबंधन: रसोई संभालने में समय का सही प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है। खाना बनाने के लिए सही समय पर सामग्री तैयार करना, पकाने का समय और परोसने का समय सभी को ध्यान में रखना पड़ता है। यह एक कुशल रसोइये की विशेषता है।
  3. आर्थिक प्रबंधन: रसोई का काम केवल खाना बनाना नहीं है, बल्कि यह बजट का भी ध्यान रखना है। सीमित संसाधनों में सर्वश्रेष्ठ भोजन तैयार करना एक चुनौती है। यह जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
  4. परिवार के सदस्यों की पसंद: हर परिवार के सदस्यों की अपनी पसंद होती है। रसोई संभालने वाले को यह समझना चाहिए कि कौन सा भोजन किसे पसंद है और उसी के अनुसार मेन्यू तैयार करना चाहिए। इससे परिवार के सदस्यों में खुशी और संतोष बना रहता है।
  5. सुरक्षा: रसोई में काम करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना भी आवश्यक है। गर्म बर्तनों, तेज चाकू और अन्य उपकरणों का सही उपयोग करना और बच्चों को सुरक्षित रखना एक जिम्मेदार रसोइये की पहचान है।
  6. संवेदनशीलता और सहानुभूति: रसोई में काम करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि परिवार के सदस्यों की भावनाएँ क्या हैं। कभी-कभी, एक अच्छा खाना किसी के दिन को बेहतर बना सकता है।

इन सभी बिंदुओं से स्पष्ट होता है कि रसोई संभालना केवल खाना बनाने का काम नहीं है, बल्कि यह एक जिम्मेदारी है जो परिवार के स्वास्थ्य, संतोष और खुशी को प्रभावित करती है।

प्रश्न 9. आपके अनुसार सिद्धेश्वरी के झूठ सौ सत्यों से भारी कैसे हैं? अपने शब्दों में उत्तर दीजिए।

उत्तर: सिद्धेश्वरी के झूठ सौ सत्यों से भारी इसलिए हैं क्योंकि वह अपने परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और एकता बनाए रखने के लिए झूठ बोलती है। उसके झूठ का उद्देश्य परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के प्रति सकारात्मक भावनाएँ उत्पन्न करना है। उदाहरण के लिए, जब वह अपने बड़े बेटे रामचंद्र से कहती है कि मोहन बहुत अच्छा पढ़ाई कर रहा है, तो वह जानती है कि मोहन वास्तव में पढ़ाई में अच्छा नहीं कर रहा है। लेकिन इस झूठ के माध्यम से वह रामचंद्र को खुश रखना चाहती है ताकि वह अपने छोटे भाई के प्रति स्नेह महसूस करे।

सिद्धेश्वरी का यह झूठ परिवार के सदस्यों के बीच तनाव को कम करता है और उन्हें एकजुट रखने का प्रयास करता है। वह जानती है कि अगर वह सच बताएगी, तो इससे परिवार में नकारात्मकता और तनाव बढ़ेगा। इस प्रकार, सिद्धेश्वरी के झूठ केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं हैं, बल्कि वे परिवार के सामंजस्य और एकता को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।

इसलिए, सिद्धेश्वरी के झूठ को एक सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जा सकता है, क्योंकि वे परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सहयोग को बढ़ावा देते हैं, जो कि वास्तविकता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष:

सिद्धेश्वरी के झूठ उसके परिवार की भलाई के लिए आवश्यक हैं और वे उसके ममता और समझदारी का प्रतीक हैं। इस प्रकार, उसके झूठ सौ सत्यों से भारी हैं, क्योंकि वे परिवार को एकजुट रखने का कार्य करते हैं।

प्रश्न 10. आशय स्पष्ट कीजिए –

(क) वह मतवाले की तरह उठी और गगरे से लोटा भर पानी लेकर गट-गट चढ़ा गई।

उत्तर: इस वाक्य का आशय यह है कि सिद्धेश्वरी, जो कि एक माँ और गृहिणी है, अपने परिवार के लिए भोजन बनाने में व्यस्त है। जब उसे प्यास लगती है, तो वह अपनी भूख को भुलाकर पानी पीने के लिए उठती है। “मतवाले की तरह उठी” का अर्थ है कि वह थोड़ी अस्थिरता के साथ, जैसे कोई नशे में हो, उठती है। यह दर्शाता है कि उसकी भूख और थकान ने उसे कमजोर कर दिया है।

गगरे से लोटा भरकर “गट-गट चढ़ा गई” का मतलब है कि उसने जल्दी-जल्दी पानी पी लिया, जैसे कि उसे बहुत प्यास लगी हो। यह स्थिति उसके जीवन की कठिनाइयों और अभाव को दर्शाती है, जहां उसे अपने और अपने परिवार के लिए भोजन की चिंता है, लेकिन वह खुद को भूखा रखकर भी परिवार के अन्य सदस्यों का ध्यान रखती है।

इस प्रकार, यह वाक्य सिद्धेश्वरी के संघर्ष और उसके परिवार के प्रति उसकी जिम्मेदारी को उजागर करता है।

(ख) यह कहकर उसने अपने मुँझले लड़के की ओर इस तरह देखा, जैसे उसने कोई चोरी की हो।

उत्तर: इस वाक्य में एक भावनात्मक स्थिति को दर्शाया गया है। यह वाक्य उस समय की स्थिति को बयां करता है जब एक व्यक्ति अपने मुँझले लड़के की ओर देखता है, और उसकी दृष्टि में एक प्रकार का संदेह या निराशा झलकती है।

भावार्थ

  • चोरी का संकेत: यहाँ “चोरी” का उल्लेख यह दर्शाता है कि व्यक्ति को अपने बेटे की गतिविधियों पर शक है। यह एक प्रकार की चिंता या असंतोष को व्यक्त करता है।
  • दृष्टि का महत्व: दृष्टि केवल देखने का कार्य नहीं है, बल्कि यह भावनाओं और विचारों का भी संचार करती है। इस वाक्य में, व्यक्ति की नजर में एक प्रकार का आरोप या प्रश्न है, जो यह दर्शाता है कि वह अपने बेटे की ईमानदारी पर सवाल उठा रहा है।

निष्कर्ष

इस वाक्य के माध्यम से लेखक ने पारिवारिक संबंधों में विश्वास और संदेह के बीच के जटिल संबंध को उजागर किया है। यह दर्शाता है कि कैसे एक साधारण दृष्टि भी गहरे भावनात्मक अर्थ रख सकती है।

इस तरह के वाक्य पाठकों को सोचने पर मजबूर करते हैं कि वे अपने आस-पास की स्थितियों को कैसे देखते हैं और उनके प्रति उनकी प्रतिक्रियाएँ क्या होती हैं।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1. अपने आस-पास मौजूद समान परिस्थितियों वाले किसी विवश व्यक्ति अथवा विवशतापूर्ण घटना का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर: विवशता का अनुभव करने वाले एक व्यक्ति का उदाहरण लेते हैं, जो हमारे आस-पास की वास्तविकता को दर्शाता है। मान लीजिए, एक व्यक्ति जिसका नाम राधेश्याम है, वह एक छोटे से गाँव में रहता है। राधेश्याम एक किसान है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सूखे के कारण उसकी फसलें बर्बाद हो गई हैं। उसके पास अब खाने के लिए पर्याप्त अनाज नहीं है और वह अपने परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ है।

राधेश्याम की पत्नी, सुमित्रा, घर में बच्चों के लिए खाना बनाने की कोशिश करती है, लेकिन उनके पास केवल कुछ चने और एक छोटी सी मात्रा में चावल है। सुमित्रा अक्सर अपने बच्चों को यह बताती है कि “जल्दी ही बारिश होगी और हम फिर से अच्छी फसल उगाएंगे।” वह अपने बच्चों को यह आश्वासन देती है ताकि वे निराश न हों, जबकि वह खुद जानती है कि स्थिति कितनी गंभीर है।

एक दिन, राधेश्याम ने गाँव के मुखिया से मदद मांगी, लेकिन मुखिया ने कहा कि गाँव में सभी को इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राधेश्याम की विवशता इस बात में है कि वह न तो अपने परिवार को सही से खिला सकता है और न ही उन्हें बेहतर भविष्य का आश्वासन दे सकता है।

इस प्रकार, राधेश्याम की कहानी हमें यह समझाती है कि कैसे गरीबी और अभाव के कारण लोग विवशता का सामना करते हैं और अपने परिवार को एकजुट रखने के लिए झूठी आशाएँ देते हैं।

प्रश्न 2. ‘भूख और गरीबी में प्रायः धैर्य और संयम नहीं टिक पाते हैं।’ इसके आलोक में सिद्धेश्वरी के चरित्र पर कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर: सिद्धेश्वरी के चरित्र पर चर्चा:

सिद्धेश्वरी कहानी ‘दोपहर का भोजन’ की केंद्रीय पात्र हैं, जो एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार की ममता और सहनशीलता का प्रतीक हैं। उनकी स्थिति यह दर्शाती है कि भूख और गरीबी में धैर्य और संयम बनाए रखना कितना कठिन होता है।

  1. ममता और त्याग: सिद्धेश्वरी अपने परिवार के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। वह अपने बच्चों और पति की भूख को प्राथमिकता देती हैं, जबकि खुद आधी रोटी खाकर गुजारा करती हैं। यह उनके त्याग और ममता का प्रतीक है। जब वह अपने छोटे बेटे प्रमोद के लिए आधी रोटी बचाती हैं, तो यह दर्शाता है कि वह अपनी भूख को अपने परिवार की भलाई के लिए त्याग देती हैं।
  2. सहनशीलता: सिद्धेश्वरी की सहनशीलता उनके चरित्र की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। वह अपने पति मुंशी जी की बेरोजगारी और परिवार की आर्थिक स्थिति को सहन करती हैं। वह कभी भी अपनी पीड़ा को व्यक्त नहीं करती, बल्कि परिवार के सदस्यों को खुश रखने का प्रयास करती हैं।
  3. समझौतावादी दृष्टिकोण: सिद्धेश्वरी ने अपनी स्थिति को स्वीकार कर लिया है। वह जानती हैं कि उनके पास सीमित संसाधन हैं, फिर भी वह अपने परिवार को एकजुट रखने का प्रयास करती हैं। वह अपने बच्चों के बीच झूठ बोलकर भी उन्हें एक-दूसरे के प्रति स्नेह बनाए रखने की कोशिश करती हैं।
  4. आत्म-निष्कासन: सिद्धेश्वरी का चरित्र यह दर्शाता है कि कैसे एक माँ अपने बच्चों के लिए सब कुछ सहन कर सकती है। वह अपने दुखों को छुपाकर परिवार के लिए एक मजबूत स्तंभ बनकर खड़ी रहती हैं।

इस प्रकार, सिद्धेश्वरी का चरित्र भूख और गरीबी के बीच धैर्य और संयम बनाए रखने का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। वह न केवल अपने परिवार की भलाई के लिए संघर्ष करती हैं, बल्कि अपने बच्चों को भी प्रेरित करती हैं कि वे कठिनाइयों का सामना करें और एकजुट रहें।

उदाहरण: जब सिद्धेश्वरी अपने बड़े बेटे रामचंद्र से मोहन की प्रशंसा करती हैं, तो यह दिखाता है कि वह परिवार के सदस्यों के बीच सकारात्मकता बनाए रखने के लिए कितनी मेहनत करती हैं।

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